खनिज संशोधन विधेयक 2026 से झारखंड के विकास और अधिकारों पर असर की आशंका: संजय सिंह

Meenu | August 16, 2026 | 05:11 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,गिरिडीह : झारखंड में खनिज अधिकारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गिरिडीह परिसदन भवन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 और झारखंड में लागू खनिज वहन भूमि उपकर को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरिडीह की महापौर पर्मिला मेहरा, उप महापौर सुमित कुमार समेत JMM के अन्य नेता मौजूद रहे।

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खनिज वहन भूमि उपकर को लेकर JMM ने रखा पक्ष

संजय सिंह ने कहा कि खनिज वहन भूमि उपकर कोई नई रॉयल्टी नहीं, बल्कि खनिज युक्त भूमि पर लगाया जाने वाला उपकर है। उन्होंने जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बाद झारखंड विधानसभा ने JMBL Cess अधिनियम पारित किया। JMM जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि खनिज वहन भूमि उपकर से राज्य को महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त हो रहा है। उनके मुताबिक, इस राजस्व का इस्तेमाल राज्य में कई जनकल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, पेयजल, स्वच्छता और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।

MMDR संशोधन विधेयक से वित्तीय स्वायत्तता पर असर की आशंका

संजय सिंह ने प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि नए प्रावधान लागू होने पर झारखंड की वित्तीय और विधायी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। उनके मुताबिक, इसका असर खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और राज्य में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

खनिज अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज

झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राजस्व का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है। JMM का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल झारखंड के विकास और खनन प्रभावित क्षेत्रों के हित में होना चाहिए। वहीं, प्रस्तावित संशोधन विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर पार्टी ने अपनी आपत्तियां सामने रखी हैं। विधेयक के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके अंतिम प्रावधानों और लागू होने के बाद की व्यवस्था के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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