Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर विवाद लगातार जारी है। कथित पेपर लीक मामले की जांच के बीच पूर्व DGP अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मामले में उनकी कथित भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि जांच को प्रभावित करने, मामले की दिशा बदलने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि कथित पेपर लीक मामले की जांच की प्रक्रिया में किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में आती है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में जांच की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों को कैसे दूर किया जाएगा। छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं की ओर से भी परीक्षा प्रक्रिया और जांच में पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
पेपर लीक के आरोपों को खारिज करने को लेकर भी सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अनुराग गुप्ता के कथित बयानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच यह सवाल है कि कथित पेपर लीक के आरोपों को खारिज करने को लेकर अनुराग गुप्ता इतने मुखर क्यों नजर आए। मीडिया के सामने आरोपों को गलत बताए जाने को लेकर भी युवाओं के बीच सवाल उठ रहे हैं। बाबूलाल ने कहा कि इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मुख्यमंत्री से स्वतंत्र जांच कराने की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि पूरे मामले में किसी भी तरह के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव की गुंजाइश खत्म की जाए। उन्होंने अनुराग गुप्ता की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
छात्रों और बेरोजगार युवाओं की भी पारदर्शी जांच की मांग
JSSC-CGL विवाद के बीच छात्र और बेरोजगार युवा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह से परे होनी चाहिए। युवाओं का कहना है कि सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में परीक्षा से जुड़े किसी भी विवाद की जांच पारदर्शी तरीके से होना जरूरी है। अब इस मामले में सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर नजर है। खास तौर पर अनुराग गुप्ता की कथित भूमिका को लेकर उठाए गए आरोपों पर क्या जांच होती है और JSSC-CGL विवाद की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

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