Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितता मामले की जांच कर रही CID की नजर अब गिरफ्तार आरोपी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी और उसके कथित नेटवर्क पर है। परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच अभ्यर्थियों के एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आए पोस्टर ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। पोस्टर में अभय तिवारी की तस्वीर के साथ उसके कथित रिश्तेदारों के नाम और तस्वीरें लगाई गई थीं। छात्रों ने दावा किया कि इनमें से कई लोग झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में सफल होकर सरकारी पदों पर कार्यरत हैं।
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पोस्टर में रिश्तेदारों के चयन का दावा
अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए पोस्टर में दावा किया गया है कि अभय तिवारी समेत उसके कई रिश्तेदारों ने JSSC CGL परीक्षा में सफलता हासिल की। इनमें कुछ लोगों के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) समेत अन्य सरकारी पदों पर कार्यरत होने की बात कही गई है। हालांकि, पोस्टर में लगाए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। CID अब इन जानकारियों का सत्यापन कर रही है।
CID जांच के दायरे में क्या है?
जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पोस्टर में दी गई सूची और संबंधित व्यक्तियों की नियुक्तियों से जुड़ी जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि संबंधित अभ्यर्थियों का चयन पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया और योग्यता के आधार पर हुआ था या परीक्षा संचालन एजेंसी से किसी तरह का कथित संबंध या अनियमितता थी।

कई रिश्तेदारों के BSO बनने का दावा
छात्रों के पोस्टर के अनुसार, अभय तिवारी के कई करीबी रिश्तेदार अलग-अलग सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। पोस्टर में निम्न नामों और पदों का उल्लेख किया गया है:
- अक्षय तिवारी: अभय के भाई बताए गए हैं। पोस्टर के मुताबिक, JSSC CGL के जरिए चयनित होकर महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत हैं। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास करने का भी दावा है।
- सुषमा कुमारी: अक्षय तिवारी की पत्नी बताई गई हैं। पोस्टर में उनके निगरानी विभाग में कार्यरत होने का दावा किया गया है।
- उपेंद्र मिश्रा: ममेरा भाई बताए गए हैं और BSO पद पर रैंक 51 का दावा किया गया है।
- तेजनारायण पंडित: चाचा के साढ़ू के बेटे बताए गए हैं और BSO पद पर रैंक 68 का दावा है।
- बापी कुमार मिश्रा: मौसा के भाई के बेटे बताए गए हैं और BSO पद पर रैंक 124 का उल्लेख है।
- विक्रम पांडेय: साले के मौसेरे भाई बताए गए हैं और BSO पद पर रैंक 127 का दावा है।
- सुमित कुमार तिवारी: बहनोई के भतीजे बताए गए हैं और BSO पद पर रैंक 143 का उल्लेख किया गया है।
पोस्टर में अभय तिवारी के भाई, भाभी, साले और साली समेत अन्य रिश्तेदारों के भी BSO पद पर चयनित होने का दावा किया गया है।
परीक्षा एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
एक ही परिवार या रिश्तेदारी से जुड़े कई लोगों के प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के दावे सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़ी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल रिश्तेदारों के सफल होने से परीक्षा में धांधली साबित नहीं होती। इसके लिए जांच एजेंसी को चयन प्रक्रिया, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि करनी होगी।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
CID अब पोस्टर में लगाए गए दावों और संबंधित अभ्यर्थियों के चयन से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC और JSSC की पूर्व परीक्षाओं से जुड़े अन्य रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। फिलहाल अभय तिवारी और उसके कथित नेटवर्क को लेकर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। CID की जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है।

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