हजारीबाग के वकीलों को ई-कोर्ट प्रणाली का प्रशिक्षण, अब ऑनलाइन मिलेंगे कोर्ट के सर्टिफाइड दस्तावेज

Meenu | July 11, 2026 | 03:09 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : न्यायिक व्यवस्था के तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के बीच हजारीबाग के अधिवक्ताओं को ई-कोर्ट प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। सर्वोच्च न्यायालय, झारखंड हाईकोर्ट और ज्यूडिशियल एकेडमी, रांची के निर्देश पर हजारीबाग बार संघ सभागार में एक दिवसीय ई-कोर्ट प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान वकीलों को ई-कोर्ट की ऑनलाइन सेवाओं, ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट और डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

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न्यायिक कार्य होगा अधिक सरल और पारदर्शी

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा ने किया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, सिविल कोर्ट के निबंधक दिव्यम चौधरी, बार संघ के अध्यक्ष राजकुमार और सचिव सुमन कुमार सिंह भी मौजूद रहे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि देशभर में न्यायालयों का तेजी से आधुनिकीकरण और कंप्यूटरीकरण हो रहा है। ऐसे में प्रत्येक अधिवक्ता और उनके सहायकों के लिए ई-कोर्ट प्रणाली की जानकारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न्यायिक कार्य अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगा तथा मामलों के निष्पादन में भी तेजी आएगी।

ई-फाइलिंग और ऑनलाइन सेवाओं की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर अधिवक्ता गौरव सहाय और अधिवक्ता दीपक कुमार गुप्ता ने ई-कोर्ट की विभिन्न सुविधाओं का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। उन्होंने अधिवक्ताओं को ऑनलाइन ई-फाइलिंग की प्रक्रिया, ई-पेमेंट सिस्टम, ई-कोर्ट पोर्टल पर अधिवक्ता पंजीकरण, मोबाइल ऐप के जरिए केस स्टेटस देखने, डिजिटल सेवाओं के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

अब ऑनलाइन मिलेंगी सर्टिफाइड कॉपियां

प्रशिक्षण में बताया गया कि अब सिविल कोर्ट हजारीबाग से जारी होने वाली मामलों की अभिप्रमाणित प्रतियां ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से प्राप्त की जा सकेंगी। इससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को कोर्ट टिकट की उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक आसान और तेज हो जाएगी। प्रशिक्षण के अंत में मास्टर ट्रेनर्स ने अधिवक्ताओं की तकनीकी जिज्ञासाओं और ई-कोर्ट प्रणाली से जुड़े विभिन्न सवालों का समाधान किया। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक सेवाओं को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और सुगम बनाना बताया गया।

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