Samachar Post रिपोर्टर, रांची : जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता 26 अक्टूबर को रांची से पटना जाने के दौरान लापता हो गए। 31 वर्षीय देवपालिक जनशताब्दी एक्सप्रेस में अपने दो सहयोगियों के साथ सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि रांची और मुरी जंक्शन के बीच उनसे संपर्क टूट गया। उनके सहकर्मियों ने रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस पर समय रहते मदद नहीं करने का आरोप लगाया है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले देवपालिक गुप्ता ने दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उनके लापता होने के बाद से सहकर्मी उनकी तलाश में जुटे हैं।
पेंट्री कार में खाना ऑर्डर करने गए थे देवपालिक
देवपालिक के दोस्त और सहकर्मी गौतम कुमार के मुताबिक, वह दो सहयोगियों के साथ रांची रेलवे स्टेशन से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार हुए थे। ट्रेन दोपहर 2:25 बजे रांची से रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान करीब 3 बजे वह मुरी स्टेशन से पहले पेंट्री कार में खाना ऑर्डर करने गए। इसके बाद वह अचानक लापता हो गए। काफी देर तक देवपालिक के वापस नहीं लौटने पर उनके साथियों ने फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद टीटी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने ट्रेन में उनकी तलाश की। मुरी स्टेशन पर ट्रेन रुकने के दौरान भी खोजबीन की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने में देरी का आरोप
देवपालिक के दोस्त गुंजन कुमार गोस्वामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर झारखंड पुलिस और रेलवे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि देवपालिक के लापता होने के बाद शिकायत दर्ज कराने के लिए उनके सहयोगियों को अलग-अलग जगहों पर भटकना पड़ा। गुंजन के अनुसार, शाम करीब 4:30 बजे ट्रेन के बोकारो पहुंचने पर रेल मदद के माध्यम से शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित सहायता नहीं मिली। आरोप है कि रेलवे सुरक्षा बल ने मामला जीआरपी का बताते हुए उन्हें वहां जाने को कहा। बोकारो जीआरपी में संपर्क करने पर मुरी में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई, जबकि मुरी पहुंचने पर रांची में रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा गया।
रात 9 बजे दर्ज हुई प्राथमिकी
सहकर्मियों का आरोप है कि काफी प्रयासों के बाद रात करीब 9 बजे देवपालिक की गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की गई। उनका कहना है कि दोपहर करीब 3 बजे लापता होने की जानकारी मिलने के बावजूद शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में लगभग छह घंटे लग गए। फिलहाल देवपालिक गुप्ता का पता नहीं चल पाया है। उनके सहकर्मियों ने पुलिस और रेलवे प्रशासन से मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने तथा उनकी तलाश तेज करने की मांग की है।
















