Samachar Post रिपोर्टर, चतरा : जिले के मयूरहंड प्रखंड के बाराडीह बेला गांव में हर साल बरसात के मौसम में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों संकट में पड़ जाती हैं। गांव के बच्चों और शिक्षकों को उत्क्रमित मध्य विद्यालय ढोढी तक पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करनी पड़ती है। तेज बहाव के बीच बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। गांव में स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
70 छात्र और शिक्षक रोज पार करते हैं नदी
विद्यालय के शिक्षक वासुदेव दांगी के अनुसार, स्कूल में कुल 91 बच्चे नामांकित हैं। इनमें करीब 70 छात्र ऐसे हैं, जिन्हें रोज स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। शिक्षकों को भी इसी रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बच्चों और शिक्षकों के लिए स्कूल आना-जाना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
जलस्तर बढ़ते ही करनी पड़ती है समय से पहले छुट्टी
तेज बारिश होने या नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका में स्कूल प्रबंधन को कई बार बच्चों की सुरक्षा के लिए समय से पहले छुट्टी करनी पड़ती है। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि बच्चे स्कूल में ही फंस जाते हैं। ऐसे में शाम के समय उनके परिजन और शिक्षक बच्चों को गोद में उठाकर तेज बहाव वाली नदी पार कराते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
बारिश में बच्चों की पढ़ाई होती है प्रभावित
बाराडीह बेला गांव के बच्चों के लिए बरसात में स्कूल जाना रोज की चुनौती बन जाता है। पार्वती, आर्यन और शिवम समेत कई बच्चों का कहना है कि नदी में अचानक पानी बढ़ने पर स्कूल पहुंचना तो मुश्किल होता ही है, घर लौटना भी जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, हर साल बारिश के मौसम में यही समस्या सामने आती है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नदी पर पुल या सुरक्षित रास्ता नहीं होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
चुनाव में पुल का वादा, बाद में समस्या जस की तस
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान गांव तक पुल बनाने का वादा किया जाता है। नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से समस्या के समाधान का भरोसा भी दिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद यह मुद्दा फिर पीछे छूट जाता है। ग्रामीण लंबे समय से नदी पर पुल बनाने या सुरक्षित आवागमन की स्थायी व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?
बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि नदी पार करते समय यदि अचानक जलस्तर बढ़ जाए या कोई बच्चा तेज बहाव की चपेट में आ जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से जल्द राहत मिलनी चाहिए। बरसात के हर सीजन में सामने आने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग लगातार उठ रही है।
DMFT फंड से समाधान का दावा
वहीं, शिक्षा पदाधिकारी कंचन कुमारी ने कहा कि जिले के DMFT फंड में पर्याप्त राशि उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि बच्चों और शिक्षकों की इस समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से नदी पर पुल बनाने या सुरक्षित आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कब तक ठोस कदम उठाया जाता है।
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