Samachar Post रिपोर्टर, रांची : चान्हो-बूचा-ओपा सिंचाई परियोजना के बांध का पानी कथित तौर पर बिना जरूरत बहाए जाने के विरोध में छह गांवों के सैकड़ों किसानों ने शुक्रवार को धरना दिया। किसान सुबह से शाम तक बांध के सामने बैठे रहे और सिंचाई व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि फिलहाल खेतों में सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं थी। इसके बावजूद बांध का पानी बहा दिए जाने से जल भंडारण का स्तर कम हो गया है। किसानों को आशंका है कि आने वाले दिनों में फसलों की सिंचाई के समय पानी की कमी हो सकती है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किसानों से की बातचीत
धरने की जानकारी मिलने के बाद सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता अमित कुमार और जेई नितेश सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने धरना दे रहे किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि भविष्य में जरूरत के बिना बांध का पानी नहीं बहाया जाएगा। विभाग की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

किसानों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
धरने के दौरान किसानों ने कार्यपालक अभियंता को आवेदन सौंपकर बांध का पानी बहाए जाने के मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही किसानों ने वर्तमान कर्मचारी को हटाकर नए सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति की मांग भी रखी। किसानों ने दुक्क चौरा के पास क्षतिग्रस्त नहर की तत्काल मरम्मत कराने और अलग-अलग स्थानों पर आउटलेट पुल बनाने की मांग की। उनका कहना है कि इन समस्याओं के समाधान से सिंचाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
छह गांवों के किसान सिंचाई परियोजना पर निर्भर
ग्रामीणों के मुताबिक, बूचा-ओपा, बुरहेंगा, गणेशपुर, चिरना, टोडांगा और हनहट गांव के किसान इस सिंचाई परियोजना पर निर्भर हैं। किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। इस संबंध में सौंपे गए आवेदन पर ग्राम प्रधान बिरसा हंसदा, विजय हंसदा, रमेश उरांव, सुरेश उरांव, सुनील उरांव, विशेश्वर महतो समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसान धरने से वापस लौट गए।

















