Samachar Post डेस्क, रांची : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पिछले कुछ दिनों में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के मामले ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना की जानकारी लेने और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। अभिजीत दीपके के देर से पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा की, जिसमें खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए पद से इस्तीफा देने की बात कही। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग करने वाली प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
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इस्तीफे वाली पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर विवाद
अभिजीत दीपके की पोस्ट सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पोस्ट में उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताया और सरकारी पत्र की तरह प्रारूप का इस्तेमाल किया। एक सोशल मीडिया यूजर ने उनकी पहचान को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। हालांकि, फिलहाल ये मांगें सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं तक ही सीमित हैं। उपलब्ध जानकारी में उनके खिलाफ किसी एफआईआर या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
पत्र में खुद को मुख्यमंत्री बताते हुए इस्तीफे की बात
अभिजीत दीपके ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया। इसमें उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए पद से इस्तीफा देने की बात कही। पत्र में उन्होंने लिखा कि वह उसी दिन मध्य प्रदेश के राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह पोस्ट बालाघाट में उनसे पूछे गए सवालों और वहां हुई आलोचना के जवाब में साझा की गई थी।

बालाघाट पहुंचते ही तीखे सवालों का सामना
बालाघाट पहुंचने के बाद स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने अभिजीत दीपके से बच्चों की मौत के मामले को लेकर सवाल किए। उनसे यह भी पूछा गया कि वह घटना के इतने दिनों बाद वहां क्यों पहुंचे। इस दौरान एक व्यक्ति ने उनसे सवाल किया कि अब आने का क्या मतलब है और क्या यह लाशों पर राजनीति करने के लिए किया जा रहा है। उनके देर से पहुंचने को लेकर मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी मेरी नहीं- अभिजीत दीपके
सवालों के जवाब में अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों ने उन्हें विधानसभा के लिए नहीं चुना है। उन्होंने कहा कि उनसे मध्य प्रदेश की व्यवस्था को ठीक करने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल करने वालों से कहा कि प्रदेश की व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े सवाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रशासन से पूछे जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने बालाघाट में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी लेने की बात कही।
30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला
बालाघाट में बैगा आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत की घटना को लेकर प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार से लगातार सवाल किए जा रहे हैं। बीमारी से हुई इन मौतों ने स्थानीय स्तर पर चिंता पैदा की है। इसी मामले की जानकारी लेने के लिए अभिजीत दीपके के बालाघाट पहुंचने के बाद उनके सवाल-जवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इसके बाद उनके व्यंग्यात्मक इस्तीफे वाले पत्र ने विवाद को और बढ़ा दिया। फिलहाल, सोशल मीडिया पर कार्रवाई की मांग के बावजूद उनके खिलाफ किसी आधिकारिक कानूनी कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है।

Reporter | Samachar Post


