Samachar Post रिपोर्टर, रांची : खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने नए खनन कानून का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार और उसके सहयोगी दल इसका विरोध अवैध खनन को संरक्षण देने के लिए कर रहे हैं। वहीं, झामुमो इस संशोधन को राज्यों के खनिज अधिकार और राजस्व से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
‘देशभर में खनन व्यवस्था में एकरूपता लाना उद्देश्य’
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों से पारित संशोधन का उद्देश्य देशभर में खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों, करों और शुल्क व्यवस्था को अधिक स्पष्ट एवं समान बनाना है। उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शुल्क और कर व्यवस्था उद्योगों के लिए जटिलता पैदा करती है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार खनिज क्षेत्र में पारदर्शी और एकरूप व्यवस्था लागू करना चाहती है।
उद्योगों और रोजगार को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि झारखंड में अधिक कर और शुल्क के कारण कई उद्योगों को दूसरे राज्यों से खनिज खरीदने की स्थिति बनती है। उनके अनुसार, यदि नियम स्पष्ट होंगे तो राज्य में निवेश बढ़ेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।
अवैध खनन को लेकर लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में अन्नपूर्णा देवी ने आरोप लगाया कि झामुमो, कांग्रेस और राजद का विरोध अवैध खनन तथा अवैध कारोबार से जुड़े हितों के कारण है। उन्होंने कहा कि नया कानून लालफीताशाही कम करेगा और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा। ये आरोप केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए हैं।
झामुमो का पक्ष क्या है?
झामुमो इस संशोधन का लगातार विरोध कर रहा है। पार्टी का कहना है कि नया कानून राज्यों के खनिज अधिकार और राजस्व पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर सितंबर में झामुमो ने राज्य के विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन भी किया था। इस प्रकार, खनन कानून को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच मुख्य विवाद खनिज संसाधनों पर राज्यों के अधिकार बनाम एक समान राष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर बना हुआ है।
















