आलमगीर आलम केस में तेजी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डे-टू-डे सुनवाई शुरू

Meenu | April 25, 2026 | 12:24 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के चर्चित 35 करोड़ रुपये के टेंडर कमीशन घोटाले में अब कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 21 अप्रैल 2026 से स्पेशल कोर्ट में इस मामले की डे-टू-डे सुनवाई शुरू हो गई है। यह केस पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से जुड़ा है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में फिलहाल जेल में हैं।

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ED छापेमारी से खुला था मामला

इस मामले की शुरुआत मई 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी से हुई थी। जांच के दौरान आलमगीर आलम के पूर्व निजी सचिव संजीव लाल और सहयोगी जहांगीर आलम के ठिकानों से 32.20 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद की गई थी। ED के मुताबिक, राज्य में टेंडर आवंटन के दौरान करीब 3% कमीशन का संगठित नेटवर्क चल रहा था, जिसके जरिए अवैध रूप से धन अर्जित कर उसे मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से छिपाया गया। एजेंसी का दावा है कि घोटाले की कुल राशि 90 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है, जो 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों से जुड़ी है।

कई आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे

इस केस में संजीव लाल और जहांगीर आलम के अलावा ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम सहित कई अन्य अधिकारी भी आरोपी हैं। कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और ED द्वारा जब्त दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया जा रहा है। इन दस्तावेजों में एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट और रजिस्ट्री डीड जैसे अहम कागजात शामिल हैं, जो केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हो रहे मुख्य आरोपी

सुरक्षा कारणों को देखते हुए मुख्य आरोपी आलमगीर आलम, संजीव लाल और जहांगीर आलम को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया जा रहा है। वहीं अन्य आरोपियों के वकील कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहकर बहस कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सख्त समयसीमा

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए ED को निर्देश दिया था कि चार सप्ताह के भीतर अहम गवाहों की गवाही पूरी की जाए। इसी आदेश के पालन में अब रोजाना सुनवाई की जा रही है।

राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला

झारखंड की राजनीति में यह केस काफी चर्चित रहा है। इसमें टेंडर प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी और बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। आने वाले दिनों में और गवाहों के बयान दर्ज होने की संभावना है, जिससे ट्रायल में और तेजी आ सकती है।

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