Samachar Post रिपोर्टर, गढ़वा : झारखंड के गढ़वा में शारदीय नवरात्रि के दौरान मांस, मुर्गा और मछली की दुकानें बंद रखने के निर्देश को लेकर विवाद शुरू हो गया है। नगर परिषद की ओर से दुकानदारों को नोटिस जारी किए जाने के बाद इस फैसले के समर्थन और विरोध में आवाजें उठने लगी हैं। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं की भावनाओं से जोड़कर उचित बता रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने खान-पान की स्वतंत्रता और प्रशासनिक अधिकारों पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में नगर परिषद अध्यक्ष आशीष सोनी उर्फ दौलत सोनी ने फैसले का समर्थन किया है। वहीं, मुस्लिम नेता मासूम खान ने इस पर आपत्ति जताई है। दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्कों के बीच अब नगर परिषद के निर्देश के आधार और इसके दायरे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नगर परिषद के नोटिस से शुरू हुआ विवाद
गढ़वा नगर परिषद की ओर से नवरात्रि के मद्देनजर मांस, मुर्गा और मछली की दुकानें बंद रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस सामने आने के बाद शहर में इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ लोग इसे धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं।
पूजा पंडालों के आसपास दुकानें बंद रखने की थी मांग
गढ़वा शहर में नवरात्रि के दौरान अलग-अलग स्थानों पर पूजा पंडाल बनाए जाते हैं। इनमें कई पंडाल मुख्य सड़कों और बाजारों के आसपास स्थित हैं। बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों और पूजा समितियों ने इन इलाकों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की दुकानें बंद रखने की मांग की थी। इस संबंध में नगर परिषद को आवेदन देने के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी आग्रह किया गया था। इसके बाद नगर परिषद अध्यक्ष के निर्देश पर दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया। हालांकि, निर्देश किन दुकानों और क्षेत्रों पर लागू होगा तथा इसे कितने समय तक प्रभावी रखा जाएगा, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
नगर परिषद अध्यक्ष आशीष सोनी ने फैसले का किया समर्थन
नगर परिषद अध्यक्ष आशीष सोनी उर्फ दौलत सोनी ने दुकानों को बंद रखने के निर्देश का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सनातन धर्म के लोगों ने नवरात्रि के दौरान इस संबंध में मांग की थी और नगर परिषद ने उसी के अनुरूप कदम उठाया है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब दूसरे समुदायों के त्योहारों के दौरान आपत्ति नहीं की जाती, तो नवरात्रि में दुकानों को बंद रखने की मांग का विरोध क्यों किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद मामले पर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
मासूम खान ने उठाया खान-पान की स्वतंत्रता का सवाल
नगर परिषद के निर्देश पर मुस्लिम नेता मासूम खान ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति या संस्था को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि दूसरा व्यक्ति कब और क्या खाए। उन्होंने इस फैसले को अनुचित बताते हुए खान-पान की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। मासूम खान ने शराब की दुकानों के आसपास मंदिरों और सरकारी विद्यालयों की मौजूदगी का सवाल भी उठाया। उनका आरोप है कि इस मुद्दे को जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये उनके द्वारा उठाए गए सवाल और आरोप हैं।
धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच बहस
गढ़वा में इस मामले को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। निर्देश का समर्थन करने वालों का तर्क है कि नवरात्रि के दौरान पूजा पंडालों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि धार्मिक आस्था के सम्मान के साथ लोगों की खान-पान संबंधी स्वतंत्रता और दुकानदारों के कारोबार के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इस विवाद में नगर परिषद के आदेश का कानूनी और प्रशासनिक आधार, उसकी भौगोलिक सीमा और उसे लागू करने की प्रक्रिया अहम होगी। निर्देश किन दुकानदारों पर लागू होगा और इसके पालन की निगरानी कैसे की जाएगी, इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। फिलहाल, गढ़वा में नवरात्रि के दौरान मांस, मुर्गा और मछली की दुकानें बंद रखने के निर्देश को लेकर बहस जारी है। अब नगर परिषद के आदेश की स्पष्टता और उसके क्रियान्वयन को लेकर आगे की स्थिति पर नजर रहेगी।























