Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कैदियों के पुनर्वास से जुड़ी कई योजनाएं पिछले करीब दस वर्षों से लंबित हैं। एक ओर जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए लगे पुराने 2G जैमर को आधुनिक तकनीक के अनुरूप अपग्रेड करने की योजना आगे नहीं बढ़ पाई है, वहीं दूसरी ओर कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रस्तावित योजनाएं भी जमीन पर नहीं उतर सकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की कई जेलों में अब भी 2G जैमर लगे हैं। ये उपकरण मुख्य रूप से 2G नेटवर्क के मोबाइल सिग्नल को बाधित करने के लिए बनाए गए हैं। ऐसे में 4G और 5G नेटवर्क के विस्तार के बीच उनकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जेलों से आपराधिक गतिविधियों के संचालन और बाहर सक्रिय गिरोहों के साथ कैदियों के संपर्क में रहने की आशंकाएं भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। विशेष शाखा की रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन और गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ के दौरान जेलों से आपराधिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आने का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन मामलों का विस्तृत ब्योरा रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
कई बार सर्वे, फिर भी जैमर अपग्रेडेशन अधूरा
जेलों में लगे जैमर को आधुनिक तकनीक के अनुरूप अपग्रेड करने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न कंपनियों को आमंत्रित किया गया था। संबंधित कंपनियों ने आधा दर्जन से अधिक बार सर्वे भी किया, लेकिन इसके बावजूद योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट की ओर से भी कई बार निर्देश दिए जाने का उल्लेख है। इसके बाद भी करीब दस वर्षों से लंबित जैमर अपग्रेडेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। मोबाइल नेटवर्क तकनीक में लगातार बदलाव के कारण जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए उपकरणों को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है। ऐसे में अपग्रेडेशन में हो रही देरी जेल प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है।

कैदियों के पुनर्वास के लिए पेट्रोल पंप की योजना भी लंबित
जेलों में बंद कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने और सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से कई योजनाएं प्रस्तावित की गई थीं। इनमें जेल परिसर में पेट्रोल पंप खोलने की योजना भी शामिल थी। प्रस्ताव के अनुसार, मुख्य मार्गों के नजदीक स्थित जेल परिसरों में पेट्रोल पंप खोलने और उनका संचालन चुनिंदा सजायाफ्ता कैदियों के माध्यम से कराने की योजना थी। इसके लिए ऐसे कैदियों को प्राथमिकता देने का विचार था, जिनका जेल में आचरण अच्छा रहा हो और जो पुनर्वास के अवसर के योग्य माने जाएं। इस पहल का उद्देश्य कैदियों को रोजगार उपलब्ध कराना, उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ाना और जेल से बाहर निकलने के बाद सामान्य जीवन में लौटने में मदद करना था।
इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम ने किया था सर्वे
जेल परिसरों में पेट्रोल पंप खोलने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम की ओर से सर्वे किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, सर्वे के बाद भी यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इस तरह कैदियों के रोजगार और पुनर्वास से जुड़ी एक अहम पहल भी लंबित रह गई। योजना के क्रियान्वयन में देरी से कैदियों को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
ओपन जेल और ओपन बैरक के प्रस्ताव प्रक्रियाधीन
जेल व्यवस्था में सुधार के लिए ओपन जेल और ओपन बैरक से संबंधित प्रस्तावों पर भी काम जारी होने की जानकारी दी गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य जेल व्यवस्था में सुधार और कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना है। हालांकि, जैमर अपग्रेडेशन और पेट्रोल पंप योजना जैसी पहलों के लंबे समय से लंबित रहने के बीच इन प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर रहेगी। अब अहम सवाल यह है कि जेलों की सुरक्षा और कैदियों के पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं को कब तक धरातल पर उतारा जा सकेगा।

















