शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी 700 अंक तक टूटे; BSE मार्केट कैप 5 लाख करोड़ घटा

Samachar Post डेस्क, रांची : भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक करीब 700 अंक तक नीचे चले गए। बाजार में बिकवाली बढ़ने से कई बड़े शेयरों में भी 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। गिरावट का सीधा असर बीएसई के कुल मार्केट कैप पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बीएसई का बाजार पूंजीकरण करीब 483 लाख करोड़ रुपये से घटकर 478 लाख करोड़ रुपये रह गया, यानी शुरुआती कारोबार में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार संपत्ति कम हुई।

30 में सिर्फ 8 शेयर बढ़त में

बीएसई के सेंसेक्स में शामिल 30 प्रमुख शेयरों में से केवल 8 शेयर मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि बाकी 22 शेयरों में गिरावट रही। बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा स्टील में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं एलटी, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव देखा गया। बाजार में गिरावट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष बढ़ने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

भारत जैसे तेल आयातक देशों पर बढ़ सकता है दबाव

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ने, व्यापार घाटा प्रभावित होने और कंपनियों की लागत बढ़ने जैसी चिंताएं पैदा हो सकती हैं। इससे बाजार के सेंटीमेंट पर भी असर पड़ सकता है।

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निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम पर

शुक्रवार की शुरुआती गिरावट के बीच निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई हैं। हालांकि शुरुआती कारोबार में तेज गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार किस दिशा में रहता है, यह आगे की वैश्विक खबरों और घरेलू निवेश धारणा पर निर्भर करेगा।

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