नियमित DGP की नियुक्ति मामले में 7 सितंबर को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

Rupa Kumari | September 2, 2026 | 04:58 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहे मामले में अब 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होगी। बुधवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अदालत की ओर से नियुक्त Amicus Curiae की रिपोर्ट राज्य सरकार को अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में रिपोर्ट देखे बिना सरकार की ओर से मामले में प्रभावी दलील रखना संभव नहीं है। कपिल सिब्बल ने अदालत से रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश देने और सुनवाई के लिए सोमवार या उसके बाद की तारीख तय करने का अनुरोध किया। अदालत ने सरकार का आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख निर्धारित कर दी। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन की पीठ में हुई।

Amicus Curiae को सौंपे गए थे जरूरी दस्तावेज

इस मामले की पिछली सुनवाई 18 अगस्त को हुई थी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने DGP की नियुक्ति से संबंधित जरूरी दस्तावेज अदालत द्वारा नियुक्त Amicus Curiae को सौंपते हुए झारखंड में DGP नियुक्ति को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। Amicus Curiae ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। हालांकि, बुधवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उसे रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली है। इसी वजह से सरकार ने रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

UPSC को अधिकारियों के नाम नहीं भेजने पर भी सवाल

नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले झारखंड सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सरकार से पूछा गया था कि DGP नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को क्यों नहीं भेजे गए। अब इस मामले में Amicus Curiae की रिपोर्ट और राज्य सरकार के पक्ष पर सुप्रीम कोर्ट में आगे सुनवाई होगी।

झारखंड में DGP नियुक्ति नियमावली को लेकर विवाद

झारखंड में DGP की नियुक्ति का मुद्दा लंबे समय से विवाद में है। याचिकाकर्ताओं की ओर से राज्य सरकार की DGP नियुक्ति नियमावली, 2024 की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने यह नियमावली तैयार करने में झारखंड अधिनियम, 1897 की धारा 21 और पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 2 का हवाला दिया है। राज्य सरकार ने इसे तैयार करते समय अन्य राज्यों में लागू नियमों को भी आधार बनाने की बात कही थी। इसी नियमावली के तहत राज्य में पहले अनुराग गुप्ता की DGP पद पर नियुक्ति हुई थी। उनके पद से हटने के बाद तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी इसी व्यवस्था के तहत की गई।

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मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

DGP नियुक्ति नियमावली और इसके तहत हुई नियुक्तियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे पर अलग-अलग अदालतों में याचिकाएं दायर की हैं। झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में राज्य सरकार की ओर से बनाई गई DGP नियुक्ति नियमावली की वैधता को चुनौती दी गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी। इसमें Amicus Curiae की रिपोर्ट और सरकार के पक्ष पर आगे की सुनवाई होगी।

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