NTPC विरोध केस में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव बरी, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा

Meenu | August 27, 2026 | 01:59 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में हजारीबाग में राष्ट्रीय तापविद्युत निगम (NTPC) के परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामले में पूर्व कांग्रेस मंत्री एवं विधायक योगेंद्र साव को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने निचली अदालतों के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें योगेंद्र साव को दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई विशिष्ट साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि साव ने किसी व्यक्ति पर हमला किया या भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया था।

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NTPC कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुआ था विरोध

मामला वर्ष 2010 में हजारीबाग में NTPC के परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों और समर्थकों ने NTPC की नीतियों और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी अस्पताल की इमारत में NTPC का कार्यालय खोले जाने का विरोध कर रहे थे। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी थी। मामले में योगेंद्र साव पर गैरकानूनी जनसमूह का नेतृत्व करने और भीड़ को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था। निचली अदालत ने उन्हें मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए योगेंद्र साव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

गवाहों के बयान ठोस आरोप साबित नहीं कर सके

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों का भी परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान सामान्य और अस्पष्ट आरोपों तक सीमित थे। ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि योगेंद्र साव ने खुद किसी अधिकारी पर हमला किया या हिंसा के लिए भीड़ को उकसाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहना या उसका राजनीतिक नेतृत्व करना मात्र आपराधिक उकसावे या हिंसा का आधार नहीं हो सकता, जब तक भाषण या कृत्य के जरिए उकसावे का ठोस प्रमाण मौजूद न हो।

अभियोजन आरोप साबित करने में रहा विफल

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह सफल नहीं रहा। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालतों के दोषसिद्धि संबंधी निष्कर्षों को निरस्त करते हुए योगेंद्र साव को मामले में बरी कर दिया।

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