बिहार में 14.3 करोड़ के गबन का आरोपी अरुण, झारखंड में JSSC परीक्षा का काम कैसे मिला?

Meenu | August 24, 2026 | 03:38 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : JSSC डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में दिल्ली से गिरफ्तार अरुण कुमार को लेकर सीआईडी की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच के मुताबिक, अरुण बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े करीब 14.3 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी रहा है और इस मामले में जेल भी जा चुका है। अब जांच का बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति पर बिहार में भर्ती परीक्षा से जुड़े गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे और जो जेल जा चुका था, उसकी कंपनी को बाद में झारखंड में JSSC की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ा काम कैसे मिला?

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बिहार सिपाही भर्ती में 14.3 करोड़ के गबन का आरोप

जांच के अनुसार, वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बिहार केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की परीक्षा का काम एक निजी कंपनी को मिला था। आरोप है कि इस दौरान परीक्षार्थियों से आवेदन शुल्क के रूप में जमा रकम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। इसी मामले में अरुण कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई और उसे जेल भी भेजा गया था। बाद में जमानत की प्रक्रिया के दौरान उसका संपर्क पटना हाईकोर्ट में सेक्शन अफसर रहे अभिषेक से हुआ। सीआईडी की जांच में सामने आया है कि इसी संपर्क के बाद अरुण, अभिषेक और कुछ अन्य लोगों के बीच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित नेटवर्क की योजना बनी।

जमानत के बाद झारखंड में काम हासिल करने का आरोप

जांच के मुताबिक, हाईकोर्ट में कथित गबन की रकम का एक हिस्सा जमा करने के बाद अरुण को जमानत मिली थी। इसके बाद झारखंड में परीक्षा से जुड़ा काम हासिल करने के लिए नेटवर्क तैयार किया गया। सीआईडी के अनुसार, परीक्षा का काम मिलने के बाद टेंडर हासिल करने में हुए कथित भारी खर्च की भरपाई के लिए परीक्षार्थियों से पैसे वसूलने की योजना बनाई गई। आरोप है कि इसके लिए परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने का नेटवर्क तैयार किया गया। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई जांच पूरी होने और अदालत में मामला साबित होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

2022 में ही पुलिस को मिल गई थी अरुण की जानकारी?

मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि सीआईडी की जांच में सामने आया है कि अरुण के बारे में पुलिस को करीब चार साल पहले ही महत्वपूर्ण जानकारी मिल चुकी थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2022 में मामले में हुई एक गिरफ्तारी के दौरान आरोपी अभिषेक ने पूछताछ में अरुण के बिहार वाले मामले, उसके जेल जाने, जमानत और झारखंड में मिले परीक्षा संबंधी काम का जिक्र किया था। बताया जा रहा है कि यह जानकारी केस डायरी में भी दर्ज की गई थी। ऐसे में अब जांच एजेंसी के सामने सवाल है कि 2022 में जानकारी सामने आने के बावजूद अरुण की गिरफ्तारी में करीब चार साल क्यों लग गए?

दिल्ली से गिरफ्तारी के बाद पुराने बयानों से जुड़ रही कड़ियां

सीआईडी ने अगस्त 2026 में अरुण कुमार को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान उसके द्वारा दी गई जानकारी और वर्ष 2022 में दर्ज आरोपी के बयान के बीच कई कड़ियां मिलने की बात सामने आ रही है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अरुण की कंपनी को JSSC की परीक्षा से जुड़ा काम किस प्रक्रिया के तहत मिला, कंपनी की पात्रता कैसे तय हुई और क्या संबंधित अधिकारियों या एजेंसियों को उसके बिहार वाले मामले की जानकारी थी। इसके अलावा कथित प्रश्नपत्र लीक और अभ्यर्थियों से पैसे की वसूली के नेटवर्क में अरुण के साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे, इसकी भी जांच की जा रही है।

अब टेंडर प्रक्रिया भी जांच के घेरे में

पूरे मामले में सिर्फ कथित प्रश्नपत्र लीक ही नहीं, बल्कि टेंडर प्रक्रिया और परीक्षा से जुड़े काम के आवंटन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अरुण की कंपनी को काम दिलाने में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई और उसके पुराने आपराधिक मामले का रिकॉर्ड संबंधित स्तर पर जांचा गया था या नहीं।

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