Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा रद्द किए जाने के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों की कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। हजारीबाग में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थापित रह चुकीं सोनम कुमारी ने राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले पर गुरुवार को सुनवाई होने की संभावना है। सोनम कुमारी की ओर से दायर रिट याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी मेमो संख्या 5404 दिनांक 18 अगस्त 2026 का हवाला देते हुए 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी गई है। याचिका में संबंधित अधिसूचना को निरस्त करने और परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है। परीक्षा निरस्त होने के बाद अन्य चयनित अभ्यर्थियों की तरह सोनम कुमारी को भी सेवा से मुक्त कर दिया गया है। इसी निर्णय के खिलाफ उन्होंने न्यायालय की शरण ली है।
बिहार में शिक्षक की नौकरी छोड़कर बनी थीं डिप्टी कलेक्टर
सोनम कुमारी का चयन JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हुआ था। चयन के बाद उन्होंने बिहार के गया जिले में शिक्षक की सरकारी नौकरी छोड़कर झारखंड प्रशासनिक सेवा में योगदान दिया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था, जिसके बाद उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला। लेकिन परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी सेवा भी समाप्त मानी गई।
करीब 200 नवचयनित अधिकारियों पर पड़ा असर
सरकार के फैसले का प्रभाव केवल सोनम कुमारी तक सीमित नहीं है। इस परीक्षा के माध्यम से नियुक्त करीब 200 उप समाहर्ता (डिप्टी कलेक्टर) भी प्रभावित हुए हैं। इनमें से अधिकांश अधिकारी प्रशिक्षण पूरा कर विभिन्न जिलों में प्रोबेशन अवधि में कार्यरत थे। परीक्षा निरस्त होने के बाद उनकी ट्रेनिंग प्रक्रिया बीच में ही रुक गई है और नियुक्ति की वैधता पर भी प्रश्न खड़े हो गए हैं। इसी कारण कई अधिकारी आगे की स्थिति जानने के लिए रांची पहुंच रहे हैं।

श्रावणी मेले में तैनात थे 63 प्रोबेशन उप समाहर्ता
श्रावणी मेले के दौरान देवघर और बासुकीनाथ में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में प्रोबेशन उप समाहर्ताओं की प्रतिनियुक्ति की गई थी। देवघर में 40 और बासुकीनाथ में 23 अधिकारियों को दंडाधिकारी के रूप में तैनात किया गया था। कुल 63 प्रोबेशन उप समाहर्ता मेले में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों को भी ड्यूटी से हटा दिया गया है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ चयनित अधिकारियों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
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हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें
JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद यह पहला प्रमुख मामला है जो न्यायालय पहुंचा है। सोनम कुमारी की याचिका पर होने वाली सुनवाई को प्रभावित अभ्यर्थी और प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी और आगे के निर्देशों से प्रभावित अधिकारियों के भविष्य को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो सकती है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

