Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तहत पिछले 15 से 30 वर्षों से अनुबंध पर कार्यरत शिक्षा कर्मियों ने वेतनमान आधारित संशोधित मानदेय और अन्य लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद कर्मी संघ ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को पत्र भेजकर मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल की अपील की है। संघ ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और राज्य परियोजना निदेशक, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद को भी पत्र भेजा है।
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264 प्रखंडों के अनुबंध कर्मियों से जुड़ा मामला
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह मामला सिर्फ जिला या राज्य परियोजना कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सभी 264 प्रखंडों में शिक्षा परियोजना के तहत कार्यरत अनुबंध कर्मियों से जुड़ा है। इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की अनुबंध शिक्षिकाएं और गैर-शैक्षणिक कर्मी, जैसे रात्रि प्रहरी, रसोइया और लेखापाल शामिल हैं। इसके अलावा बीआरसी कार्यालयों में कार्यरत आदेशपाल, अकाउंटेंट, बीपीओ, जेई तथा जिला परियोजना कार्यालयों के ऑपरेटर, लेखापाल, स्टेनो, एओ, एपीओ, एडीपीओ, एई समेत अन्य परियोजना कर्मी भी मांगों के दायरे में हैं। संघ का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या में कर्मी दो दशक से अधिक समय से शिक्षा विभाग से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं।
सातवें वेतनमान के अनुरूप लाभ और स्वास्थ्य बीमा की मांग
संघ ने वेतन में सम्मानजनक वृद्धि के साथ सातवें वेतनमान के अनुरूप लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा सेवाकाल में मृत्यु होने पर अनुकंपा का लाभ, आंतरिक प्रोन्नति, सभी कर्मियों की सेवा पुस्तिका का संधारण और राज्य कर्मियों की तर्ज पर स्वास्थ्य एवं समूह बीमा सुविधा देने की मांग भी उठाई गई है। संघ का दावा है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद कई कर्मी अब भी अनुबंध व्यवस्था के तहत चतुर्थ वेतनमान में कार्यरत हैं। इससे कर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है।

2024 की वार्ता का भी दिया हवाला
संघ ने राज्य परियोजना निदेशक के साथ 15 अक्टूबर 2024 को हुई वार्ता का भी हवाला दिया है। संघ के मुताबिक, उस बैठक में वेतन वृद्धि और CPI लाभ से संबंधित प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य कार्यकारिणी समिति के समक्ष रखने की बात कही गई थी। संघ का कहना है कि इस दिशा में अब तक अपेक्षित सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में आगामी राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इन मांगों पर ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का दावा
परियोजना कर्मियों का कहना है कि वे राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीआरसी से लेकर जिला और राज्य स्तर तक ये कर्मी स्कूलों की मॉनिटरिंग, शैक्षणिक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्य, डाटा प्रबंधन और तकनीकी सहयोग समेत विभिन्न योजनाओं के संचालन में योगदान दे रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की अनुबंध शिक्षिकाएं और अन्य कर्मचारी आवासीय विद्यालयों के संचालन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
संघ ने कहा है कि उसकी मांगों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं का सम्मानजनक और स्थायी समाधान हासिल करना है। हालांकि, मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी है। संघ के पदाधिकारियों राजीव शरण, रोहिणी प्रसाद, मनमोहन साहू, रश्मि कुमारी, अखिलेश कुमार, पम्मी सिन्हा और बागेश्वरी कुमारी समेत अन्य परियोजना कर्मियों ने सरकार से वेतन, सेवा शर्त, प्रोन्नति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

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