Samachar Post रिपोर्टर, रांची : संसद से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक के खिलाफ झारखंड में सियासी विरोध तेज हो गया है। रविवार को रांची स्थित RJD प्रदेश कार्यालय में महागठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। बैठक में केंद्र सरकार पर झारखंड के खनिज अधिकारों को कमजोर करने और संघीय ढांचे को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया। महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेताओं ने राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को आवेदन भेजने और 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की विस्तृत बैठक बुलाकर आगे के आंदोलन की रणनीति तय करने की बात कही।
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विधेयक को बताया झारखंड के हितों के खिलाफ
RJD की प्रदेश उपाध्यक्ष अनिता यादव ने कहा कि खनिज संशोधन बिल झारखंड के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के संसाधनों पर केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं और विधेयक वापस नहीं होने पर आंदोलन को व्यापक किया जाएगा।
माले ने भी जताया विरोध
भाकपा माले के शुवेंदू सेन ने RJD की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विधेयक से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान के साथ-साथ यह संघीय ढांचे से जुड़े सवाल भी खड़े करता है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन पहले राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को आवेदन भेजकर विधेयक के संभावित प्रभावों से अवगत कराएगा। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार को विधेयक वापस लेना चाहिए।
आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
CPI नेता अजय सिंह ने भाजपा के झारखंड से जुड़े सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस विधेयक को लेकर राज्य की जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की बैठक में आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने की बात भी उन्होंने कही। अजय सिंह ने कहा कि झारखंड की जनता अपने खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों को लेकर आंदोलन करेगी।

माले नेता ने केंद्र पर लगाया संघीय ढांचा कमजोर करने का आरोप
माले नेता आनंद प्रसाद गुप्ता ने केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन इस मुद्दे पर रणनीति बनाकर केंद्र के खिलाफ मजबूत आंदोलन खड़ा करेगा। उन्होंने झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में रोजगार और कृषि से जुड़ी कई चुनौतियां हैं, ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है।
युवा RJD ने भी जताया विरोध
युवा RJD प्रदेश अध्यक्ष रंजन यादव ने विधेयक को झारखंड के विकास से जोड़ते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक से राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है। बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर विधेयक का विरोध करने और झारखंड के खनिज अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
22 अगस्त की बैठक पर रहेगी नजर
महागठबंधन की ओर से अब 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की विस्तृत बैठक बुलाने की बात कही गई है। इस बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तय होने की संभावना है। फिलहाल महागठबंधन की ओर से राष्ट्रपति को आवेदन भेजने और विधेयक वापस नहीं होने की स्थिति में आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी ने झारखंड की राजनीति में इस मुद्दे को और गरमा दिया है।

Reporter | Samachar Post

