अवैध कब्जे और कटते जंगलों पर बड़ा एक्शन, झारखंड में 10,715 वर्ग किमी का इको-कॉरिडोर नेटवर्क बनेगा

Rupa Kumari | July 17, 2026 | 12:10 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में जंगलों पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध कटाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। वन विभाग और कैंपा (CAMPA) के संयुक्त प्रयास से पहली बार स्ट्रेटजी एंड एक्शन प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ कॉरिडोर्स (SAPCC) को लागू करने की तैयारी की गई है। इस योजना के तहत राज्य के खंडित वन क्षेत्रों को आपस में जोड़कर एक व्यापक इको-कॉरिडोर नेटवर्क विकसित किया जाएगा।

10,715 वर्ग किमी क्षेत्र बनेगा वन्यजीवों का सुरक्षित गलियारा

योजना के अनुसार झारखंड में 75 संभावित वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) की पहचान की गई है। इनकी कुल लंबाई 3,649 किलोमीटर से अधिक होगी और यह नेटवर्क 10,715.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैलेगा। यह राज्य के कुल वन क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य इस पूरे क्षेत्र को संरक्षण आधारित प्रबंधन के दायरे में लाना है, जिससे झारखंड का 16 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवागमन क्षेत्र बन सके।

पांच चरणों में एक दशक तक चलेगा अभियान

यह परियोजना अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। पहले चरण में उन कॉरिडोरों पर काम होगा जिन्हें ‘वेरी हाई प्रायोरिटी’ और ‘क्रिटिकल कॉरिडोर’ की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद अन्य क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य हाथी, बाघ और अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों के खंडित होने से वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे उनकी आबादी और जैविक विविधता पर असर पड़ता है। इको-कॉरिडोर विकसित होने से वन्यजीव एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित पहुंच सकेंगे और मानव बस्तियों में उनके प्रवेश की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की तैयारी

राज्य सरकार ने इस योजना में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और हितों को भी शामिल किया है। “झारखंड इकोलॉजिकल कॉरिडोर नेटवर्क फॉर नेचर कंजर्वेशन एंड ह्यूमन वेल-बीइंग” के तहत इंसानों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए वन प्रमंडल स्तर पर विशेष निगरानी टीमें गठित की जाएंगी, जो कॉरिडोर क्षेत्रों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करेंगी।

सैटेलाइट और GIS तकनीक से होगी निगरानी

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सैटेलाइट इमेजिंग, जीआईएस मैपिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से वन क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। राज्य के बोकारो, हजारीबाग, पलामू, रांची, संथाल परगना और सिंहभूम वन क्षेत्र इस नेटवर्क के प्रमुख केंद्र होंगे।

तीन स्तरों में विभाजित होगा संरक्षण क्षेत्र

योजना के तहत कॉरिडोर क्षेत्रों को तीन प्रबंधन श्रेणियों में बांटा जाएगा, इंटेंसिव मैनेजमेंट ज़ोन: अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र, जहां संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और मानव हस्तक्षेप सीमित रहेगा। मॉडरेट मैनेजमेंट ज़ोन: बफर क्षेत्र, जहां विकास कार्य और संरक्षण गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जाएगा। लो मैनेजमेंट ज़ोन: बाहरी क्षेत्र, जहां सामान्य निगरानी और संरक्षण उपाय लागू किए जाएंगे।

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जंगलों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो झारखंड में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है। साथ ही, अवैध कब्जे और जंगलों के विखंडन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

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