साहिबगंज में PMAY 2.0 लाभुक सूची पर विवाद, ग्रामीणों ने पंचायत सचिव का किया घेराव

Rupa Kumari | July 14, 2026 | 05:36 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, साहिबगंज : बोरियो प्रखंड की बांझी संथाली पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) 2.0 की लाभुक सूची को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पंचायत सचिव परमानंद मंडल का पंचायत भवन में करीब दो घंटे तक घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा में कई अपात्र लोगों को योग्य घोषित कर दिया गया, जबकि दर्जनों पात्र लाभुकों के नाम सूची से हटा दिए गए। मामले को लेकर पंचायत क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।

70 पात्र लाभुकों के नाम हटाने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार ऑनलाइन सर्वेक्षण के बाद कुल 487 लाभुकों की सूची तैयार की गई थी। आरोप है कि बाद में ग्राम सभा पंजी में करीब 70 पात्र लाभुकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिन लोगों को योजना का लाभ मिलना चाहिए था, उनके नाम सूची से हटाकर अन्य लोगों को शामिल किया गया। इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं।

पंचायत सहायक पर परिवार को लाभ पहुंचाने का आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत सहायक राजेश रजवार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी का नाम भी योग्य लाभुकों की सूची में शामिल करवा लिया। साथ ही कई अन्य अपात्र लोगों को सूची में बनाए रखने का आरोप भी लगाया गया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पंचायत की मुखिया मयबिटी बेसरा भी पंचायत भवन पहुंचीं और पंचायत सचिव से जवाब मांगा। मुखिया मयबिटी बेसरा ने कहा कि लाभुकों की सूची में बदलाव किस आधार पर किया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि ग्राम सभा पंजी पर उनके हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान मौजूद नहीं है। मुखिया का कहना है कि ग्राम सभा अध्यक्ष की स्वीकृति और हस्ताक्षर के बिना लाभुक सूची में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जाना चाहिए था। ऐसे में पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

रिश्वत मांगने के भी लगे आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सर्वेक्षण के दौरान कुछ लोगों से आवेदन प्रक्रिया के नाम पर धन की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि योग्य लाभुक घोषित कराने के लिए भी अवैध राशि मांगी गई थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पंचायत भवन में उनसे बिना पूरी जानकारी दिए हस्ताक्षर कराए गए थे। विवाद बढ़ने पर पंचायत सचिव परमानंद मंडल ने सफाई देते हुए कहा कि कुछ लाभुकों को मानवीय भूल के कारण अयोग्य चिह्नित कर दिया गया था। उन्होंने किसी भी प्रकार की जानबूझकर की गई अनियमितता से इनकार किया। पंचायत सचिव ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। बाद में उन्होंने मुखिया के समक्ष लिखित रूप से खेद व्यक्त किया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

यह भी पढ़ें: बिहार में 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार

जांच की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पंचायत सहायक को तत्काल पदमुक्त करने की मांग भी उठाई गई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Share this news

संबंधित खबरें