TGT-2021 शिक्षकों की देरी से नियुक्ति प्रशासनिक चूक, अभ्यर्थियों को मिलेगा वरिष्ठता और वेतनमान का लाभ: हाईकोर्ट

Rupa Kumari | July 11, 2026 | 01:03 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT)-2021 नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक देरी का नुकसान अभ्यर्थियों को नहीं उठाना पड़ेगा। अदालत ने निर्देश दिया है कि देरी से नियुक्त हुए शिक्षकों को भी उनके साथ चयनित अन्य अभ्यर्थियों के समान वरिष्ठता, अपग्रेड वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले से जुड़ी करीब आठ याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 की नियुक्ति प्रक्रिया में चयनित 12 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों को समान सेवा लाभ मिलना चाहिए।

नियुक्ति में देरी के लिए अभ्यर्थी जिम्मेदार नहीं

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी के लिए अभ्यर्थियों की कोई भूमिका नहीं थी। ऐसे में प्रशासनिक कारणों से विलंबित नियुक्ति का असर उनकी वरिष्ठता और सेवा लाभों पर नहीं पड़ना चाहिए। अदालत ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों को केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्हें उसी आधार पर लाभ दिया जाए, जिस आधार पर उनके साथ चयनित अन्य शिक्षकों को लाभ प्राप्त हुआ है।

आरक्षण और मेरिट सूची को लेकर उठा था विवाद

मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2016 की टीजीटी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे सामने आए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आरक्षण नीति, जिला एवं राज्य स्तरीय मेरिट सूची और चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। याचिकाओं में दावा किया गया कि कुछ मामलों में अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए, जबकि कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों का चयन हो गया। इसी विवाद के कारण नियुक्ति प्रक्रिया लंबी खिंची और कई शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2021 में जाकर पूरी हो सकी।

हजारों शिक्षकों को मिल सकता है लाभ

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि झारखंड के विभिन्न जिलों में वर्ष 2020 से 2023 के बीच लगभग 4,282 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले का लाभ उन बड़ी संख्या में शिक्षकों को मिल सकता है, जिनकी नियुक्ति प्रशासनिक कारणों से निर्धारित समय के बाद हुई थी। शिक्षा जगत में इस आदेश को शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला माना जा रहा है।

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शिक्षकों के लिए राहत भरा आदेश

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में उन मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है, जहां चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रशासनिक विलंब के कारण प्रभावित हुई हो। हाईकोर्ट ने अपने आदेश के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी प्रक्रियाओं में देरी का दुष्प्रभाव चयनित उम्मीदवारों के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।

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