महागठबंधन में समन्वय के लिए कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग, कांग्रेस ने सुझाए तीन नाम

Rupa Kumari | June 27, 2026 | 03:54 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन से जल्द कोऑर्डिनेशन कमेटी के गठन की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पूर्व समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद गठबंधन दलों के बीच समन्वय की कमी महसूस की जा रही है। कांग्रेस ने प्रस्तावित कोऑर्डिनेशन कमेटी के लिए प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और उपनेता राजेश कच्छप के नाम सुझाए हैं। पार्टी का मानना है कि गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित संवाद और नीति समन्वय के लिए समिति का सक्रिय होना जरूरी है। महागठबंधन की पिछली कोऑर्डिनेशन कमेटी का नेतृत्व शिबू सोरेन कर रहे थे। इस समिति का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो गया था। इसके बाद नई समिति का गठन नहीं हो सका है, जिससे गठबंधन के भीतर समन्वय तंत्र निष्क्रिय पड़ा हुआ है।

कांग्रेस और झामुमो नेताओं की प्रतिक्रिया

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि पार्टी ने मुख्यमंत्री से इस विषय पर आग्रह किया है और जल्द ही इस संबंध में विस्तृत चर्चा भी की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि बोर्ड, निगम और आयोगों में रिक्त पदों को भरने का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा। वहीं झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार पांडेय का कहना है कि गठबंधन दलों के बीच किसी तरह का संचार संकट नहीं है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री गठबंधन की आवश्यकताओं को समझते हैं और समय-समय पर समाधान निकालते रहे हैं।

बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों की मांग तेज

महागठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से राज्य के बोर्ड, निगम और आयोगों में रिक्त पदों को भरने की मांग भी लगातार उठ रही है। उनका तर्क है कि सरकार के कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बीत चुका है और संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए।

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कई महत्वपूर्ण पद रिक्त

जानकारी के अनुसार, झारखंड राज्य आवास बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसी तरह झारखंड राज्य गो सेवा का कार्यकाल भी हाल ही में खत्म हुआ है। आने वाले महीनों में युवा आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के पद भी रिक्त होने वाले हैं। इसके अलावा कई अन्य बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्तियां लंबित हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कोऑर्डिनेशन कमेटी के गठन और लंबित नियुक्तियों पर फैसला महागठबंधन के भीतर संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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