Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : झारखंड का हजारीबाग जिला प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक सौहार्द की मिसाल के लिए भी जाना जाता है। जिले के कटकमसांडी प्रखंड स्थित जलमा गांव में मुहर्रम के अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिलती है, जहां एक हिंदू परिवार पिछले छह पीढ़ियों से ताजिया बनाने की परंपरा निभा रहा है। 73 वर्षीय अंतू साव का परिवार वर्षों से मुहर्रम के दौरान ताजिया तैयार करता आ रहा है। गांव में निकलने वाले मुहर्रम जुलूस की शुरुआत भी उनके घर से होती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले उनके घर के सामने फातिहा पढ़ी जाती है, जिसके बाद अन्य ताजिए जुलूस के रूप में कर्बला की ओर रवाना होते हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही परंपरा
अंतू साव बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने इस परंपरा की शुरुआत की थी, जिसे आज भी परिवार पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ आगे बढ़ा रहा है। उनका मानना है कि यह परंपरा गांव में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मुहर्रम के दौरान उनका परिवार न केवल ताजिया निर्माण में जुटता है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ ताजिया मिलान और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है।
यह भी पढ़ें: गिरिडीह में 28 से 30 जून तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान, 4.91 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दवा
नई पीढ़ी संभाल रही विरासत
इस सांस्कृतिक विरासत को अब परिवार की नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। अंतू साव के बेटे और पोता ताजिया निर्माण की बारीकियां सीख रहे हैं। परिवार के युवा सदस्य बताते हैं कि उनके परदादा, दादा और पिता ने इस परंपरा को जीवित रखा और अब वे भी इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। ताजिया निर्माण में गांव के मोहम्मद शमी सहित मुस्लिम समुदाय के कई लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इस कार्य को पूरा करते हैं, जो गांव की सामाजिक एकता को और मजबूत बनाता है।

एकता और भाईचारे का संदेश
ऐसे समय में जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की बातें अक्सर सामने आती हैं, जलमा गांव की यह परंपरा आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे का मजबूत संदेश देती है। यह गांव बताता है कि विविधता में एकता ही भारत की असली पहचान है।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

