Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : जिले के कटकमदाग प्रखंड स्थित बेस पंचायत का मरहांद गांव औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित आयरन स्पंज फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, आयरन डस्ट और औद्योगिक कचरा खेती, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार मरहांद और आसपास के क्षेत्र में संचालित आयरन स्पंज इकाइयों, जिनमें नरसिम्हा आयरन एंड स्टील फैक्ट्री, समेत अन्य फैक्ट्रियां शामिल हैं, से निकलने वाला धुआं और धूल आसपास के कई गांवों तक फैल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह घरों की छतों, पेड़-पौधों और खेतों पर काली धूल की परत जमी हुई दिखाई देती है। उनका आरोप है कि रात के समय फैक्ट्रियां अधिक क्षमता के साथ संचालित होती हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है।
खेती पर पड़ रहा असर
किसानों का दावा है कि कोयले की राख और आयरन डस्ट के कारण फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई किसानों का कहना है कि मेहनत के बावजूद उत्पादन कम हो रहा है और बाजार में भी उनके उत्पादों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही। ग्रामीणों के अनुसार प्रदूषण की वजह से कृषि आधारित आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है और कई परिवार आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने सांस संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि की शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय पर्याप्त रूप से लागू नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्रियों में प्रभावी फिल्टर और उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली होती, तो प्रदूषण का स्तर कम किया जा सकता था।
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भूजल और जलस्रोतों पर भी चिंता
ग्रामीणों ने औद्योगिक कचरे के निपटान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर वेस्टेज खुले क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास डंप किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय जोखिम बढ़ रहा है। साथ ही, इलाके में भूजल स्तर लगातार नीचे जाने की भी शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी के लिए सैकड़ों फीट गहरी बोरिंग करानी पड़ रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और झारखंड सेल्स एजेंसी सहित से मामले की जांच कराने तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि उद्योगों का संचालन जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल स्थानीय लोग फैक्ट्रियों के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और औद्योगिक कचरे के निपटान की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

