Samachar Post रिपोर्टर, गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले के दूधपानियां निवासी हुलास महतो पिछले एक महीने से अबू धाबी की जेल में बंद हैं। परिवार का दावा है कि हुलास को 28 मई 2026 को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद से वह जेल में हैं। उनकी रिहाई को लेकर परिजनों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग की है। परिजनों के अनुसार, हुलास महतो 11 मार्च 2026 को रोजगार के लिए अबू धाबी गए थे, जहां वह एक निजी कंपनी में कार्यरत थे।
साथ गिरफ्तार दो लोगों की हो चुकी है रिहाई
परिवार ने बताया कि हुलास महतो को गिरिडीह के ही बनपुरा निवासी बलदेव सिंह और एक तमिलनाडु के युवक के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में 11 जून को अन्य दोनों व्यक्तियों को रिहा कर भारत भेज दिया गया, जबकि हुलास अब भी जेल में बंद हैं। इस वजह से परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
परिवार पर टूटा संकट
हुलास महतो के परिवार में उनकी दिव्यांग पत्नी, बुजुर्ग मां, एक बेटा और एक बेटी हैं। परिवार का कहना है कि हुलास ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है कि हुलास को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है। प्रवासी श्रमिकों के मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने हुलास महतो के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जुटाने की सलाह दी है ताकि संबंधित सरकारी विभागों और एजेंसियों के समक्ष हुलास की रिहाई तथा सुरक्षित वापसी के लिए अपील की जा सके।
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सरकार से हस्तक्षेप की मांग
परिवार ने केंद्र और राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर हुलास महतो की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने तथा उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाएंगे और हुलास जल्द अपने परिवार के बीच वापस लौट सकेंगे। फिलहाल हुलास महतो की गिरफ्तारी के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

