सरकारी रिकॉर्ड से मेचुआ गांव का नाम गायब, ग्रामीणों ने रोकी जनगणना

Rupa Kumari | May 25, 2026 | 01:41 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर :जमशेदपुर के पोटका प्रखंड स्थित मेचुआ गांव में प्रशासनिक रिकॉर्ड से गांव का नाम गायब होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने गांव में चल रहे जनगणना (हाउस लिस्टिंग) कार्य का विरोध करते हुए सर्वे टीम को वापस लौटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकारी रिकॉर्ड में मेचुआ गांव का नाम शामिल नहीं किया जाता, तब तक गांव में किसी भी प्रकार का सर्वे या जनगणना कार्य नहीं होने दिया जाएगा।

जनगणना टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध

जानकारी के अनुसार जनगणना विभाग की टीम निर्धारित कार्यक्रम के तहत गांव में हाउस लिस्टिंग सर्वे करने पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों ने कर्मचारियों को जानकारी देने से इनकार कर दिया और सर्वे कार्य रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि एसीसी (आधारभूत जनगणना) डेटा में मेचुआ गांव का नाम ही दर्ज नहीं है। उनका कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से गांव सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण मंगल सोरेन ने कहा कि जब तक गांव का नाम सरकारी डेटा में नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक किसी भी तरह का सर्वे नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सोमवार को ग्रामीण पोटका प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ से मुलाकात करेंगे और अपनी समस्या रखेंगे।

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जनगणना टीम और प्रशासन का पक्ष

जनगणना टीम के कर्मचारी संतु कुमार ने बताया कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार सर्वे करने पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण काम नहीं हो सका। पूरे मामले की रिपोर्ट पोटका बीडीओ को सौंप दी गई है। वहीं पोटका के बीडीओ अरुण मंडा ने कहा कि ग्रामीण सरना कोड से जुड़े मुद्दे को लेकर भ्रमित हैं, जबकि जनगणना कार्य का उससे कोई संबंध नहीं है।

जांच के आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त राजीव रंजन ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य सरकार के निर्देश पर कराया जा रहा है और यदि ग्रामीणों को किसी प्रकार की समस्या या भ्रम है तो वे प्रखंड, अनुमंडल या जिला स्तर के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। जिला जनगणना पदाधिकारी मोहम्मद मोजाहिद अंसारी ने कहा कि उन्हें फिलहाल घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है। मामले में पोटका के चार्ज पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है।

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