Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग :हजारीबाग जिले में 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब तक समय पर किताबें नहीं मिल पाई हैं। इसके साथ ही स्कूल संचालन के लिए जरूरी विद्यालय विकास कोष भी जारी नहीं किया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। फंड की कमी का सबसे ज्यादा असर शिक्षकों पर पड़ा है। कई स्कूलों में शिक्षक अपने पैसे से नामांकन पंजी, उपस्थिति रजिस्टर, चॉक, डस्टर और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने को मजबूर हैं। कुछ शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने 10 हजार रुपये तक अपनी जेब से खर्च कर दिए हैं ताकि पढ़ाई बाधित न हो।
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1457 स्कूलों पर पड़ा असर
हजारीबाग जिले में कक्षा 1 से 8 तक कुल 1457 सरकारी स्कूल संचालित हैं। हर साल इन स्कूलों को सरकार की ओर से ग्रांट दी जाती है, जिससे शिक्षण सामग्री, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन किया जाता है। लेकिन इस बार फंड की अनुपलब्धता के कारण कई स्कूल “जुगाड़” के सहारे चल रहे हैं और शिक्षक किसी तरह पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। नियमों के अनुसार विद्यालय विकास कोष की राशि मार्च महीने में जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन 2025-26 सत्र का फंड समय पर जारी नहीं हुआ और लेप्स हो गया। वहीं 2026-27 सत्र शुरू होने के 24 दिन बाद भी स्कूलों तक कोई राशि नहीं पहुंची है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
विद्यालय विकास कोष क्या है और कैसे होता है उपयोग
समग्र शिक्षा अभियान के तहत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद स्कूलों को यह फंड प्रदान करती है। इस फंड का उद्देश्य स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षण संसाधनों को बनाए रखना होता है। छात्रों की संख्या के आधार पर स्कूलों को अलग-अलग राशि दी जाती है, जिससे पढ़ाई की सामग्री, साफ-सफाई, पेयजल और शौचालय जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं। यह राशि स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के खाते में जाती है और इसका उपयोग शिक्षक व समिति मिलकर करते हैं।
पढ़ाई पर सीधा असर, चुनौती बनी स्थिति
फंड और संसाधनों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षक अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विभागीय देरी के कारण स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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