Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद राज्य निर्वाचन विभाग सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
बीएलओ के काम की होगी ग्राउंड जांच
बैठक में निर्देश दिया गया कि अधिकारी खुद फील्ड में जाकर बीएलओ के काम की भौतिक जांच करें। हर घर पर बीएलओ की जानकारी वाला स्टिकर लगा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। जिन मकानों का नंबर नहीं है, वहां बीएलओ को नोशनल नंबर देने को कहा गया है। साथ ही बीएलओ रजिस्टर में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों का नाम और हाउस नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
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पैरेंटल मैपिंग पर विशेष जोर
बैठक में पैरेंटल मैपिंग को अहम बताया गया। निर्देश दिया गया कि डोर-टू-डोर अभियान के दौरान छूटे मतदाताओं को तुरंत जोड़ा जाए। एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ और डुप्लिकेट मतदाताओं की सूची तैयार कर उन्हें चिन्हित करने को भी कहा गया है। निर्देश दिया गया कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ मतदान केंद्रों के नक्शे की सॉफ्ट कॉपी साझा की जाए। बीएलए-2 के माध्यम से एब्सेंट, शिफ्टेड और डुप्लिकेट मतदाताओं की सूची का सत्यापन कराने पर भी जोर दिया गया।
48 घंटे में शिकायतों का निपटारा
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि “बुक ए कॉल” के जरिए मिलने वाली हर शिकायत का 48 घंटे के भीतर समाधान किया जाए। साथ ही मैपिंग में किसी तरह की त्रुटि न हो, इसके लिए सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
एक भी मतदाता न छूटे, लक्ष्य तय
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए। काम समयबद्ध तरीके से पूरा करने और हर स्तर पर सावधानी बरतने को कहा गया है। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, ट्रेनिंग नोडल अधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर समेत सभी जिलों के अधिकारी ऑनलाइन शामिल हुए।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।