Samachar Post रिपोर्टर,जमशेदपुर :अब स्टील उत्पादन से निकलने वाला कचरा भी काम आएगा। टाटा स्टील का ब्लास्ट फर्नेस स्लैग अब निर्माण कार्य में उपयोग किया जाएगा। कंपनी की अनुषंगी इकाई आईबीएमडी इस दिशा में तेजी से काम कर रही है, जिससे स्लैग अब रेत का विकल्प बनकर उभरेगा। इस पहल की शुरुआत जमीनी स्तर पर हो चुकी है। जमशेदपुर के मानगो में बन रहे फ्लाईओवर में हर महीने करीब 2000 टन स्लैग आधारित एग्रिगेट की सप्लाई की जा रही है। इससे साफ है कि यह तकनीक अब प्रयोग से आगे बढ़कर उपयोग में आ चुकी है।
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पर्यावरण और लागत- दोनों में फायदा
कंपनी के अनुसार, एक टन स्टील उत्पादन के साथ बड़ी मात्रा में स्लैग और कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। ऐसे में इस वेस्ट को उपयोगी बनाना जरूरी है। स्लैग से बने निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से लागत में करीब 15% तक कमी आ सकती है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जो पर्यावरण के लिए लाभकारी है।
ईंट, पेवर ब्लॉक और गिट्टी का विकल्प
कंपनी स्लैग से सड़क निर्माण के लिए एग्रिगेट, फ्लाई ऐश ईंट, पेवर ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री तैयार कर रही है। ये उत्पाद पारंपरिक ईंट और गिट्टी का मजबूत विकल्प बन सकते हैं। भविष्य में भवन निर्माण से जुड़े लगभग सभी जरूरी उत्पाद स्लैग से बनाने की योजना है।
सीमेंट कंपनियों को भी हो रही सप्लाई
टाटा स्टील हर साल ACC Limited, Dalmia Cement और Nuvoco Vistas Corp Ltd जैसी बड़ी कंपनियों को करीब 8 मिलियन टन स्लैग सप्लाई कर रही है। वहीं कुल मिलाकर लगभग 18 मिलियन टन स्लैग का उपयोग बाय-प्रोडक्ट के रूप में किया जा रहा है। कंपनी अपने उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले ISI सर्टिफिकेशन का इंतजार कर रही है। इसके लिए लंबे समय से रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम चल रहा है। साथ ही प्रोडक्ट के पेटेंट की प्रक्रिया भी जारी है।
खड़गपुर में नया प्लांट, रेलवे में उपयोग की तैयारी
भविष्य की योजना के तहत खड़गपुर में नया प्लांट लगाया जाएगा, जहां से GGBS तैयार कर पूर्वोत्तर राज्यों तक सप्लाई की जाएगी। इसके अलावा रेलवे में नई लाइन बिछाने के लिए भी इस सामग्री के उपयोग पर बातचीत चल रही है।
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