असम चुनाव में झारखंड के नेताओं की एंट्री, 28 को हेमंत की सभा, 29 को बाबूलाल का दौरा

Rupa Kumari | March 27, 2026 | 01:31 PM IST
  • असम चुनाव में झारखंड के नेताओं की एंट्री, कोकराझार बना सियासी केंद्र

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: असम विधानसभा चुनाव में अब झारखंड की सियासत भी खुलकर नजर आने लगी है। भाजपा, झामुमो और कांग्रेस ने वहां रह रहे बिहार-झारखंड के प्रवासी मतदाताओं को साधने के लिए अपने नेताओं को मैदान में उतार दिया है। इसी रणनीति के तहत कोकराझार में बड़े नेताओं के दौरे तय हुए हैं, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 28 मार्च को असम के कोकराझार में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। उनका कार्यक्रम दोपहर 2:20 बजे हारापुता फुटबॉल मैदान में प्रस्तावित है। झामुमो के लिए यह सभा बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

29 मार्च को बाबूलाल मरांडी का दौरा

वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी 29 मार्च को असम पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि वे भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के साथ-साथ प्रवासी वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे।

यह भी पढ़ें: रामनवमी पर सीएम हेमंत सोरेन ने पत्नी कल्पना सोरेन संग तपोवन मंदिर में की पूजा, बोले यह पर्व एकता का प्रतीक

प्रवासी वोटरों पर पार्टियों की नजर

असम में बड़ी संख्या में बिहार और झारखंड के लोग रहते हैं। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इन प्रवासी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहे हैं। झारखंड के नेताओं की मौजूदगी से इन वोटरों के साथ सीधा जुड़ाव बनाने की कोशिश हो रही है। असम चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी 21 उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। इससे चुनावी समीकरणों में नई हलचल देखने को मिल रही है।

झामुमो की स्टार प्रचारकों की सूची जारी

झामुमो ने असम चुनाव के लिए 20 स्टार प्रचारकों की संशोधित सूची जारी की है।डॉ. सरफराज अहमद, कल्पना मुर्मू सोरेन, डॉ. महुआ माजी, विनोद कुमार पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य, सुदिव्य कुमार, दीपक बिरुवा, चमरा लिंडा, योगेंद्र प्रसाद, विजय हांसदा, हफीजुल हसन, भूषण तिर्की और विकास मुंडा जैसे नेता शामिल हैं।

चुनाव में बढ़ी हलचल

भाजपा और कांग्रेस ने भी अपने-अपने स्टार प्रचारकों में झारखंड के नेताओं को शामिल किया है। कुल मिलाकर, असम का चुनाव अब बहु-राज्यीय प्रभाव वाला बन गया है, जहां झारखंड की राजनीतिक सक्रियता भी साफ दिखाई दे रही है।

Share this news

संबंधित खबरें