Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना तय लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। देश के 100 सबसे पिछड़े प्रखंडों में शामिल झारखंड के 14 प्रखंडों में योजना की प्रगति बेहद धीमी है। इन प्रखंडों के 3,40,291 घरों में से अब तक केवल 29,433 घरों (8.65%) तक ही पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंच पाया है।
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मोहम्मदगंज में सबसे खराब स्थिति
पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड में सबसे खराब स्थिति देखने को मिली है। यहां 9,823 घरों में से सिर्फ 39 घरों (0.40%) तक ही नल का पानी पहुंचा है। इसके अलावा गढ़वा के सगमा में 1.22%, पलामू के हैदरनगर में 1.73%, पाकुड़ के हिरणपुर में 2.97%, पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी में 2.80% घरों तक ही योजना पहुंच सकी है।
कुछ प्रखंडों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रगति
हालांकि कुछ प्रखंडों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन वहां भी लक्ष्य काफी दूर है। गढ़वा के कांडी में 32.64%, गोड्डा के मेहरमा में 8.12%, जामताड़ा के करमाटांड़ में 3.23%, पाकुड़ के महेशपुर में करीब 7.9%, पाकुड़ प्रखंड में 7.90%, पलामू के पिपरा में 10.22%, साहिबगंज के मंडरो में 8.17%, साहिबगंज प्रखंड में 11.44%, तालझारी में 9.49% घरों तक नल जल योजना का लाभ पहुंचा है।

28 लाख ग्रामीण परिवार अब भी वंचित
वर्ष 2019 में शुरू हुई जल जीवन मिशन की अवधि दिसंबर 2024 तक निर्धारित थी, लेकिन अधूरे कार्यों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया है। इसके बावजूद झारखंड के लगभग 27.89 लाख ग्रामीण परिवार अब भी नल के पानी से वंचित हैं और पेयजल के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने की इस महत्वाकांक्षी योजना की धीमी प्रगति से तय समय सीमा में लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती बन गया है। अब सभी की निगाहें योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर टिकी हैं।

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