Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग :झारखंड के हजारीबाग जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक पिता ने अपने घायल बेटे की पढ़ाई रुकने नहीं दी। केरेडारी थाना क्षेत्र के कंडाबेर गांव निवासी रामवृक्ष साव अपने बेटे ओमप्रकाश कुमार को मैट्रिक परीक्षा दिलाने के लिए रोज उसे पीठ पर बैठाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचा रहे हैं।
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दुर्घटना में टूट गया पैर, नहीं टूटा हौसला
बताया गया कि 7 फरवरी को परीक्षा देकर घर लौटते समय केरेडारी चौक के पास सड़क हादसे में ओमप्रकाश का दायां पैर टूट गया। चोट के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। ऐसे में पिता ने तय किया कि किसी भी हाल में बेटे की परीक्षा नहीं छूटेगी। तब से वे उसे पीठ पर उठाकर घर से निकलते हैं और बाइक से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाते हैं। सोमवार को संस्कृत विषय की अंतिम परीक्षा थी, जिसे दिलाने के लिए भी रामवृक्ष बेटे को उसी तरह लेकर पहुंचे। ओमप्रकाश का सपना पढ़-लिखकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना है। चोट और दर्द के बावजूद उसके हौसले बुलंद हैं।
आर्थिक तंगी के बीच भी शिक्षा को प्राथमिकता
रामवृक्ष और उनकी पत्नी दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। बेटे के घायल होने के बाद उन्होंने काम पर जाना लगभग छोड़ दिया है। उनका कहना है कि फिलहाल बेटे की परीक्षा और इलाज सबसे जरूरी है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद शिक्षा के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ। गांव के लोग रामवृक्ष के जज्बे की सराहना कर रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद वह अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं देना चाहते।
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