- कागज पर मान्यता, जमीन पर ढहती व्यवस्था
- जूते हाथ में लेकर नदी पार कर कॉलेज पहुंची जांच टीम | रिपोर्ट में लिखा- बिना रास्ता, स्टूडेंट्स के कॉलेज पहुंचने का सवाल ही नहीं
Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में फार्मेसी शिक्षा की स्थिति किसी दूर के सपने की तरह है जहां असलियत कम, कागजी कहानी ज्यादा है। कागज पर कॉलेज, कागज पर बिल्डिंग, कागज पर लैब और कागज पर क्लास… लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग पिछले चार महीनों से लगातार सख्त कार्रवाई में जुटा है। दो माह से ताबड़तोड़ निरीक्षण जारी है। विभाग ने फार्मेसी काउंसिल को साफ निर्देश दिया है कि जो कॉलेज 80% से कम नॉर्म्स पूरे कर रहे हैं, उन्हें बंद करने की अनुशंसा की जाए।
राज्य में वर्तमान में 104 फार्मेसी कॉलेज संचालित हैं। जांच समिति अब तक 65 से अधिक कॉलेजों की रिपोर्ट विभाग को सौंप चुकी है, जिनमें से 20 से ज्यादा संस्थानों को बंद करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कई कॉलेजों की स्थिति ऐसी पाई गई है, जिसे देख स्वास्थ्य विभाग से लेकर फार्मेसी काउंसिल तक हतप्रभ है। किसी कॉलेज तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ रही है, कहीं 1500 वर्गफीट में पूरा कॉलेज चल रहा है, कहीं प्रिंसिपल का कक्ष तक नहीं, तो ऐसे भी उदाहरण हैं जहां क्लासरूम के साथ बंधन बैंक और फाइनेंस कंपनी भी उसी बिल्डिंग में संचालित हो रही थी।
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सभी फार्मेसी कॉलेजों की कड़ाई से हो रही जांच, कार्रवाई जल्द
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस मामले में कहा कि पूरे राज्य में संचालित फार्मेसी कॉलेजों की कड़ाई से जांच कराई जा रही है। जैसे ही सभी कॉलेजों की जांच पूरी हो जाएगी, समिति की अनुशंसा के आधार पर कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी। जिन कॉलेजाें में ज्यादा कमियां मिली है और बंद करने की अनुशंसा हुई है उन्हें तत्काल बंद कर दिया जाएगा।