Samachar Post रिपोर्टर, रांची : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां लोग एक दिन पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हैं, वहीं रांची जिले के राहे प्रखंड के कदमडीह गांव निवासी राखोहरि महतो पिछले करीब 35 वर्षों से लगातार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने वर्ष 1991 से अब तक 10 हजार से अधिक पेड़ लगाकर ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की है। राखोहरि महतो बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय चैता महतो खेती किया करते थे। बाद में उन्होंने अपनी लगभग चार एकड़ निजी जमीन को पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। इस भूमि पर उन्होंने फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए, जो आज विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं।
कई प्रजातियों के वृक्षों से विकसित हुआ प्राकृतिक वन
उनके द्वारा लगाए गए वृक्षों में कुसुम, साल, नीम, बरगद, गम्हार, जामुन, आम, करम, पलाश, शीशम, बैर समेत कई स्थानीय और उपयोगी प्रजातियां शामिल हैं। समय के साथ यह क्षेत्र प्राकृतिक वन जैसा विकसित हो गया है, जहां पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है। इससे स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिला है।
बिना किसी सहायता के जारी है अभियान
राखोहरि महतो वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता या निजी लाभ की अपेक्षा के इस कार्य में लगे हुए हैं। वे आज भी स्वयं पेड़ों की देखभाल और संरक्षण करते हैं। उनका मानना है कि पेड़ जीवन का आधार हैं और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए वृक्षारोपण सबसे बड़ा दायित्व है। पीपीके कॉलेज बुंडू के टीआरएल विभागाध्यक्ष प्रो. भूतनाथ प्रामाणिक ने कहा कि राखोहरि महतो का योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। जब एक ओर जंगलों की कटाई हो रही है, वहीं उन्होंने अपनी निजी जमीन को हरियाली से भरकर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है।
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सम्मानित करने की उठी मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने राज्य सरकार एवं प्रशासन से मांग की है कि राखोहरि महतो के इस दीर्घकालिक और प्रेरणादायक योगदान को सम्मानित किया जाए। उनका मानना है कि ऐसे लोगों को प्रोत्साहन मिलने से समाज में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। राखोहरि महतो की कहानी यह साबित करती है कि यदि एक व्यक्ति भी ठान ले, तो वह अपने प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।