Samachar Post रिपोर्टर,रांची :झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) घोटाले की जांच में एक अहम मोड़ सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मांगे जाने के बावजूद राज्य सरकार ने घोटाले से जुड़े अधिकारियों के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। सूत्रों के अनुसार, ED ने ECIR दर्ज करने के बाद राज्य सरकार को पत्र भेजकर कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मांगे थे, लेकिन अब तक कोई दस्तावेज साझा नहीं किया गया है।
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अधिकारियों की संपत्ति विवरण की भी मांग
ED ने संबंधित अधिकारियों के वार्षिक संपत्ति विवरण की भी मांग की थी। नियमों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों को हर वर्ष अपनी संपत्ति का ब्योरा जमा करना होता है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि अधिकारियों की नौकरी में आने से पहले और बाद की संपत्तियों में कितना अंतर है और क्या इसमें कोई असामान्य वृद्धि हुई है। इसके अलावा, ED ने यह भी जानकारी मांगी थी कि संबंधित अधिकारियों के सेवा काल में किसी प्रकार की अनियमितताएं हुई थीं या नहीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
जांच में सहयोग नहीं मिलने पर उठे सवाल
सरकारी स्तर से दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ED की जांच में सहयोग को लेकर इस स्थिति ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

CBI जांच और लंबी कानूनी लड़ाई
गौरतलब है कि JPSC घोटाले में CBI ने प्राथमिकी दर्ज करने के करीब 12 साल बाद आरोप पत्र दाखिल किया था। इस दौरान मामले में लंबी कानूनी लड़ाई भी चली, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। जांच प्रक्रिया के दौरान ट्रायल कोर्ट के कई निर्देश महत्वपूर्ण रहे, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन प्रमुख था।
पुनर्मूल्यांकन में सामने आईं अनियमितताएं
न्यायालय के निर्देश पर JPSC द्वारा कॉपियों का पुनः मूल्यांकन कराया गया, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में अंकों में वृद्धि जैसी गड़बड़ियां भी पाई गईं, जिसने पूरे भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।

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