Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में संचालित फार्मेसी कॉलेजों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को निर्देश दिया है कि बिना एनओसी और तय मानकों के चल रहे सभी फार्मेसी कॉलेजों की विस्तृत जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपी जाए। मंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों और प्रशासनिक आधारों पर ऐसे संस्थानों को संचालन की अनुमति दी गई, जहां पर्याप्त भवन, प्रयोगशाला, शिक्षक और आधारभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।
जांच रिपोर्ट में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
दरअसल, हाल ही में सामने आई जांच समिति की रिपोर्ट में राज्य के 70 फार्मेसी कॉलेजों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के अनुसार 34 कॉलेज कथित रूप से फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं, जबकि 34 अन्य संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डी-फार्मा की पढ़ाई कराने वाले सभी 70 कॉलेजों ने 2022 में जारी विभागीय आदेश के बावजूद अब तक एनओसी नहीं लिया है।
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विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश
डॉ. इरफान अंसारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत, भ्रष्टाचार या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित संस्थानों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार कठोर कदम उठाएगी।
सभी संस्थानों की होगी समीक्षा
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को राज्य के सभी फार्मेसी संस्थानों की मान्यता, फैकल्टी, लैब सुविधा, आधारभूत संरचना और छात्र हित से जुड़े पहलुओं की व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल और फार्मेसी शिक्षा को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन गुणवत्ता और नियमों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. अंसारी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाना है, ताकि राज्य का स्वास्थ्य विभाग देश के बेहतर राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सके।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।