Samachar Post रिपोर्टर,चतरा :झारखंड सरकार ने चतरा जिले में स्टोन माइनिंग लीज से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह मामला दिल्ली की दो कंपनियों को दी गई माइनिंग लीज और उसके बाद हुई कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में दिल्ली की दो कंपनियों M/s Shipra Power and Fuel Pvt. Ltd. और M/s Buddha Smriti Mining Infracon Pvt. Ltd. को चतरा में स्टोन माइनिंग की लीज दी गई थी।
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DC ने 2021 में रद्द कर दी थी लीज
फरवरी 2021 में चतरा के उपायुक्त ने झारखंड माइनर मिनरल्स रूल 2004 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दोनों कंपनियों की माइनिंग लीज समय से पहले रद्द कर दी थी। इसके बाद कंपनियों ने इस फैसले को खान आयुक्त (माइनिंग कमिश्नर) के समक्ष चुनौती दी, लेकिन मार्च 2023 में खान आयुक्त ने भी उपायुक्त के आदेश को सही ठहराया।
हाईकोर्ट से कंपनियों को मिली राहत
मामले को लेकर दोनों कंपनियां झारखंड हाईकोर्ट पहुंचीं। सुनवाई के दौरान कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि उपायुक्त को समय से पहले माइनिंग लीज रद्द करने का अधिकार नहीं है। कंपनियों का कहना था कि यह अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है और उन्होंने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन भी नहीं किया। बताया जा रहा है कि सरकारी पक्ष की ओर से इस दलील का प्रभावी विरोध नहीं किया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उपायुक्त और खान आयुक्त दोनों के आदेश को रद्द कर दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची राज्य सरकार
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला अब राज्य में माइनिंग लीज और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर अहम कानूनी बहस का विषय बन गया है।
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