Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा: भारतीय रेलवे ने जामताड़ा में रिकॉर्ड समय में अंडरपास बनाकर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। बेवा बाईपास स्थित लेवल क्रॉसिंग गेट संख्या 8/SPL/E पर महज 7 से 8 घंटे के भीतर सीमित ऊंचाई वाले अंडरपास (सबवे) का निर्माण पूरा कर लिया गया। हालांकि इस उपलब्धि के साथ रेलवे की विकास प्राथमिकताओं को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं। रविवार सुबह 7:40 बजे शुरू हुआ निर्माण कार्य दोपहर 3 बजे तक पूरा कर लिया गया। रेलवे अधिकारियों ने इसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि बताया, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह तेजी उन क्षेत्रों में दिखाई जा रही है जहां ट्रैफिक का दबाव बेहद कम है, जबकि शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों की समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाम, सुनसान जगहों पर विकास
स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का आरोप है कि रेलवे की योजनाएं जमीनी जरूरतों से मेल नहीं खा रहीं। मिहिजाम और जामताड़ा शहर के कई रेलवे फाटक ऐसे हैं जहां रोजाना एम्बुलेंस, स्कूली बसें और आम लोग लंबे समय तक जाम में फंसे रहते हैं। कई स्थानों पर फ्लाईओवर निर्माण भौगोलिक कारणों से संभव नहीं है, ऐसे में छोटे अंडरपास सबसे प्रभावी समाधान माने जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि रेलवे को उन जगहों पर प्राथमिकता देनी चाहिए जहां आम जनता को सीधा लाभ मिल सके, न कि ऐसे इलाकों में जहां ट्रैफिक की समस्या नगण्य है।
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अधिकारियों की निगरानी में चला रिकॉर्ड निर्माण अभियान
इस परियोजना को मिशन मोड में पूरा किया गया। आसनसोल मंडल के वरिष्ठ मंडल अभियंता राजीव रंजन, विनित भगत, पिंटू दास और जे राज की निगरानी में भारी क्रेनों की मदद से सबवे का पहला हिस्सा स्थापित किया गया। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस की तैनाती की गई थी। आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर रंजीत पांडेय के नेतृत्व में पूरे अभियान की निगरानी की गई। रेलवे के अनुसार अंडरपास से जुड़ा शेष कार्य 17 मई 2026 को पूरा किया जाएगा।
विकास मॉडल पर उठे सवाल
रेलवे की तकनीकी सफलता के बावजूद स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन केवल उन स्थानों को चुन रहा है जहां निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान है। व्यस्त इलाकों में तकनीकी चुनौतियों का हवाला देकर परियोजनाओं को लंबे समय तक लंबित क्यों रखा जा रहा है। शहरवासियों का आरोप है कि प्रशासन आम जनता की सुविधा से ज्यादा रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ध्यान दे रहा है, जिससे वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा।
तकनीकी उपलब्धि तभी सार्थक, जब जनता को मिले राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड समय में अंडरपास निर्माण निश्चित रूप से रेलवे की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है, लेकिन विकास का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब ऐसी योजनाएं उन इलाकों तक पहुंचेंगी जहां लोग रोजाना रेल फाटकों पर जाम और असुविधा का सामना करते हैं। जब तक जामताड़ा और मिहिजाम के व्यस्त क्षेत्रों में इस तरह की सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक बेवा बाईपास का यह अंडरपास तकनीकी उपलब्धि तो कहलाएगा, लेकिन आम लोगों के लिए इसका महत्व सीमित ही रहेगा।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।