Samachar Post रिपोर्टर, रांची: भारतीय जनता पार्टी के नेता आदित्य साहु ने राज्य में सामने आए कथित ट्रेजरी घोटाले को बेहद गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला तत्कालीन संयुक्त बिहार के चर्चित पशुपालन घोटाले से भी बड़ा साबित हो सकता है। आदित्य साहु ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि विभिन्न जिलों के ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) की ओर से सरकार को भेजी गई जानकारी बेहद गंभीर है और इससे संकेत मिलता है कि घोटाले का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
सिस्टम और सत्ता की जानकारी में हुआ खेल
साहु ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों या पुलिसकर्मियों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि “सिस्टम और सत्ता” की जानकारी में एक सुनियोजित नेक्सस के जरिए अवैध निकासी होती रही। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अब तक की कार्रवाई अस्पष्ट और संदेह के घेरे में दिखाई देती है। भाजपा शुरू से इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करती रही है।
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सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग
आदित्य साहु ने मांग की कि राज्य सरकार ट्रेजरी घोटाले पर श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि किन-किन जिलों में कितनी राशि की अवैध निकासी हुई है। उन्होंने यह भी पूछा कि महालेखाकार ने किन गड़बड़ियों की ओर सरकार का ध्यान दिलाया और अब तक किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई है।
सीआईडी जांच के दायरे पर उठाए सवाल
साहु ने कहा कि अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने 24 अप्रैल को बोकारो और हजारीबाग मामलों की जांच शुरू की और एक होमगार्ड जवान तथा एक एएसआई को गिरफ्तार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि रांची, चाईबासा और पलामू समेत अन्य जिलों में हुई कथित अवैध निकासी को सीआईडी जांच के दायरे से बाहर क्यों रखा गया, जबकि इन जिलों में भी प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारियां हुई हैं।
ई-कुबेर पोर्टल और DDO की भूमिका पर सवाल
आदित्य साहु ने ई-कुबेर पोर्टल में कथित छेड़छाड़ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि इंप्लॉयर मास्टर डेटा बेस में बदलाव कर करोड़ों की निकासी की गई, तो संबंधित डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को इसकी भनक कैसे नहीं लगी। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि अब तक कितने डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों से पूछताछ की गई है।
जांच की समयसीमा बताने की मांग
साहु ने कहा कि एक ओर सीआईडी की एसआईटी जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनी समिति अलग स्तर पर जांच कर रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या दोनों जांच एजेंसियों के लिए कोई समयसीमा तय की गई है और 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड कब तक जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएंगे।
ट्रेजरी निरीक्षण पर भी सवाल
भाजपा नेता ने कहा कि ट्रेजरी कोड के तहत वेतन भुगतान से पहले कई स्तरों पर जांच और ऑडिट की व्यवस्था होती है। साथ ही उपायुक्तों को नियमित रूप से ट्रेजरी निरीक्षण करना होता है। उन्होंने सरकार से पिछले छह वर्षों में हुए ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी निरीक्षण का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। साहु ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर वित्तीय निगरानी और ऑडिट की जिम्मेदारी थी, वही अब संदेह के घेरे में हैं।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।