Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को कथित टेंडर घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली, जिसके बाद करीब दो साल बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की बेंच में हुई। अदालत के फैसले के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
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हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
इससे पहले आलमगीर आलम को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। 11 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस समय जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने बेल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां अब उन्हें राहत मिल गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कथित टेंडर घोटाले और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, आलमगीर आलम के करीबी लोगों के ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। ईडी के मुताबिक, उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल और नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों से करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद मिले थे। इस बरामदगी के बाद जांच एजेंसी ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में बंद थे।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
आलमगीर आलम झारखंड की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और पिछली सरकार में मंत्री पद संभाल चुके हैं। ऐसे में उनकी जमानत के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज होना तय माना जा रहा है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
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