Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा में पारित नहीं किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों पर गहरा आघात बताया है और कहा कि यह केवल राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण विषय है।
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विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार
अर्जुन मुंडा ने अपने बयान में कहा कि महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह अधिनियम उनके सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस पहल को आगे बढ़ने से रोक दिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
महिलाओं के सपनों को झटका
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक विधेयक का विरोध नहीं है, बल्कि उन सपनों के खिलाफ कदम है जो देश की महिलाओं ने अपने बेहतर और समान भविष्य के लिए देखे हैं। उनके अनुसार यह एक ऐतिहासिक अवसर था, जिससे महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को नई दिशा मिल सकती थी।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
अर्जुन मुंडा ने कहा कि नारी समाज और राष्ट्र की नींव है, ऐसे में उनके अधिकारों और अवसरों को सीमित करना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मतभेद भुलाकर महिलाओं के सम्मान, अधिकार और भागीदारी को प्राथमिकता दें, क्योंकि देश की प्रगति महिलाओं की प्रगति से ही जुड़ी है।
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