नवजातों की जिंदगी बचाने की पहल: झारखंड के 60 से अधिक अस्पतालों में हाईटेक NBSU यूनिट का विस्तार

Rupa Kumari | March 25, 2026 | 11:54 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,पलामू: झारखंड में नवजात शिशुओं की मौत अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हर 1000 जन्म पर करीब 25 बच्चों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले वर्षों में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं।

60 से ज्यादा अस्पतालों में बनेगी NBSU यूनिट

इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। झारखंड के 60 से अधिक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (NBSU) स्थापित की जाएगी। इसके लिए सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

क्यों होती है नवजातों की मौत?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिकतर नवजातों की मौत जन्म के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर), कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी। समय पर सही इलाज और निगरानी मिलने पर इन मामलों में काफी हद तक जान बचाई जा सकती है।

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लेबर रूम के पास होगी सुविधा

नई NBSU यूनिट्स को अस्पताल के लेबर रूम या मैटरनिटी वार्ड के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि गंभीर स्थिति में नवजात को तुरंत इलाज मिल सके और रेफरल में देरी न हो। मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MMCH) में रोजाना औसतन 10 गंभीर नवजात इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई बार मरीज देर से पहुंचते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। अधिकतर मामले ग्रामीण इलाकों से रेफर होकर आते हैं।

आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाइयां

इन नई इकाइयों में रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इसके साथ ही संक्रमण रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू होंगे और बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल कई जिलों में NBSU की सुविधा सीमित है। उदाहरण के तौर पर पलामू जिले में केवल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है, जबकि कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब भी इससे वंचित हैं।सरकार की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि नवजातों को समय पर बेहतर इलाज मिलेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आएगी। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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