Samachar Post रिपोर्टर, गुमला: गुमला जिले के अंजनगांव में रामनवमी के पावन अवसर पर हनुमान जी के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पूरे परिवार के साथ सुबह-सुबह मंदिर पहुंचकर आराधना में शामिल हुए। अंजनगांव को हनुमान जी की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। स्थानीय साहित्यकार अजय किशोर नाथ पांडे के अनुसार, यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। यहां 365 महुआ के पेड़, 365 तालाब और 365 शिवलिंग मौजूद हैं। कहा जाता है कि माता अंजनी प्रतिदिन तालाब में स्नान करती थीं, महुआ के दातुन से दातुन करती थीं और अलग-अलग शिवलिंग पर जलाभिषेक करती थीं।
प्रशासनिक और सरकारी पहचान
पांडे ने बताया कि अब प्रशासन और सरकार की ओर से अंजनगांव को विशेष पहचान मिल रही है। पहले सड़क व्यवस्था न होने के कारण यहां पहुंचना कठिन था। उल्लेखनीय है कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी झारखंड राज्यपाल रहते हुए इस मंदिर में दर्शन कर चुकी हैं।
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रामनवमी पर विशेष भव्य आयोजन
भक्त संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इस पावन स्थल पर आकर एक अलग खुशी मिलती है। रामनवमी पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जबकि अन्य दिनों में भी मंगलवार को काफी संख्या में भक्त यहां आते हैं। उरांव समाज के लोग विशेष श्रद्धा के साथ पांव में जूते नहीं पहनकर झंडा लेकर आते हैं और हनुमान जी के बाल स्वरूप के समीप झंडा स्थापित कर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
विकास की पहल
अजय किशोर नाथ पांडे ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि रामनवमी के अवसर पर अंजनगांव में विशेष महोत्सव आयोजित किया जाए। पर्यटन विभाग ने कुछ विकास कार्य किए हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर विकास अभी बाकी है। हाल के दिनों में गुमला में पदस्थ डीसी के माध्यम से इस स्थल के विकास के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, जिससे अब ज्यादा लोग यहां आकर आस्था और विश्वास के साथ दर्शन करते नजर आते हैं।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।