Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड में झामुमो और कांग्रेस के बीच गठबंधन में दरार तेज़ होती जा रही है। कांग्रेस ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा कर दी है, जिससे राज्य की सत्ता के गलियारों में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है।
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कांग्रेस का आंदोलन, माइनिंग माफिया और प्रशासन पर हमला
प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजू ने कहा कि माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित है और 70 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं। कांग्रेस मांग कर रही है कि समन्वय समिति और 20 सूत्री कमेटियों का गठन हो, जिसमें कांग्रेस भी शामिल हो।
राज्यसभा चुनाव और राजनीतिक रुख
मई में होने वाले झारखंड राज्यसभा चुनाव में दोनों दलों की रणनीति और गठबंधन की एकजुटता पर राजनीति की नई दिशा तय होगी। इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 प्रथम वरीयता मत हैं, जिसमें झामुमो के 34 और कांग्रेस के 16 विधायक शामिल हैं। इस सीट पर जीत के लिए दोनों दलों के सहयोग पर नजर है।
पिछली घटनाओं से बढ़ा विवाद
कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी हाईकमान से मिलकर राज्य सरकार की नीतियों पर आपत्ति जताई। नगर निकाय और असम विधानसभा चुनावों में दोनों दलों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। बजट सत्र में कांग्रेस और झामुमो के बीच बढ़ती दूरी और झामुमो-भाजपा नजदीकी पर राजनीतिक हलचल रही। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को ‘विषैला सांप’ तक कहा। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने क्षेत्रीय भाषाओं (भोजपुरी, मगही) के मुद्दों पर कांग्रेस को किनारे करने पर आपत्ति जताई। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्यसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव दोनों दलों के रिश्तों की असली परीक्षा होंगे।
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