संघर्ष से सफलता तक: जामताड़ा की चंपा पाल बनीं नेशनल ट्रेनर, हजारों महिलाओं को दे रहीं आत्मनिर्भरता की राह

Rupa Kumari | March 24, 2026 | 01:48 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : जामताड़ा जिले के मिहिजाम थाना क्षेत्र के बेवा गांव की रहने वाली चंपा पाल आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। आर्थिक तंगी, कम उम्र में शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले और मेहनत से नई पहचान बनाई है।

संघर्षों के बीच शुरू हुआ सफर

चंपा पाल का जीवन आसान नहीं रहा। कम उम्र में शादी के बाद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2015 में उन्होंने आरएसईटीआई (RSETI) में 21 दिनों का निशुल्क प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने सिलाई-कटाई और अन्य हुनर सीखे। प्रशिक्षण के बाद चंपा ने खुद की सिलाई मशीन खरीदी और घर से काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके काम की पहचान बनने लगी और वे फैंसी कपड़े, सूट-साड़ी सिलकर हर महीने 15-16 हजार रुपये कमाने लगीं।

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ट्रेनर से बनीं नेशनल ट्रेनर

उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए आरएसईटीआई ने उन्हें ट्रेनर बना दिया। आज चंपा पाल सरकारी स्तर पर नेशनल ट्रेनर के रूप में कार्य कर रही हैं और झारखंड एवं बिहार में अब तक 3,000 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। 3,000 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण करीब 800 महिलाएं सिर्फ जामताड़ा से चंपा की प्रेरणा से कई महिलाएं अब खुद का रोजगार शुरू कर चुकी हैं और अपने परिवार का सहारा बन रही हैं।

आय का मजबूत स्रोत

चंपा को ट्रेनिंग देने के लिए हर महीने करीब 32,000 रुपये मानदेय मिलता है। इसके अलावा परीक्षा के दौरान उन्हें 2,500 रुपये प्रतिदिन का भत्ता भी मिलता है। साथ ही वे सिलाई का काम जारी रखकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। चंपा से प्रशिक्षण लेने वाली कई महिलाएं आज खुद का व्यवसाय चला रही हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर हिम्मत और जज्बा हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता आसान हो सकता है। चंपा पाल आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी हैं।

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