JPSC पेपर लीक विवाद: CID पूछताछ में श्वेता गुप्ता के कथित खुलासे, अध्यक्ष की भूमिका पर उठे सवाल

Meenu | August 16, 2026 | 11:06 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक मामले में CID की जांच आगे बढ़ने के साथ पूछताछ में सामने आए बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मामले में नामजद आरोपी श्वेता गुप्ता से CID ने पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका और आयोग की प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा। इन बयानों में पेपर लीक की कथित जानकारी मिलने, TDPL कंपनी के इंपैनलमेंट, WhatsApp के जरिए उत्तर भेजने, CCTV मॉनिटरिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े दावे शामिल हैं।

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पेपर लीक की जानकारी मिलने पर अध्यक्ष को बताया था

CID की पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर बताया कि रामवीर सिंह ने उन्हें जानकारी दी थी कि धर्मेंद्र नाम का व्यक्ति उस पर प्रश्न पत्र आउट करने का दबाव बना रहा है। श्वेता के अनुसार, उन्होंने यह जानकारी तत्काल JPSC अध्यक्ष के संज्ञान में ला दी थी। उनका कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि मामले में समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

TDPL कंपनी के इंपैनलमेंट पर क्या कहा?

पूछताछ में TDPL कंपनी के चयन को लेकर भी सवाल किए गए। श्वेता गुप्ता के कथित बयान के अनुसार, कंपनी के ब्लैकलिस्ट होने की चर्चा के बीच JPSC की ओर से मौखिक रूप से बताया गया था कि कंपनी ब्लैकलिस्टेड नहीं है। उनके मुताबिक, TDPL को इंपैनल करने का अंतिम निर्णय अध्यक्ष का था और उन्हें निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत फाइल आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। श्वेता ने यह भी बताया कि उन्होंने कंपनी के फाइनेंशियल कोटेशन की जांच की थी और उसे सही पाया था। उनके कथित बयान के अनुसार, जिस जांच का जिक्र किया जा रहा था, वह TDPL से संबंधित नहीं बल्कि किसी दूसरी कंपनी से जुड़ी थी और उस जांच के आदेश लिखित नहीं, बल्कि मौखिक थे।

WhatsApp पर उत्तर भेजने को लेकर दी सफाई

CID ने उस्मान नामक व्यक्ति को WhatsApp के जरिए उत्तर भेजे जाने को लेकर भी सवाल किए। श्वेता के कथित बयान के अनुसार, उस्मान रांची से बाहर रहता था और परिणाम जल्द जारी करने का दबाव था। इसी वजह से समय बचाने के लिए WhatsApp के माध्यम से जानकारी भेजे जाने की बात उन्होंने कही। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। स्कैनिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पूछताछ हुई। श्वेता गुप्ता के कथित बयान के अनुसार, कमरे में लगे CCTV कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग JPSC के अध्यक्ष अपने मोबाइल फोन के जरिए करते थे। यह दावा जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अध्यक्ष के निर्देश पर तैयार हुआ फाइनल रिजल्ट?

रिजल्ट तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया को लेकर श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर CID को बताया कि वह स्वयं परिणाम जारी करने के पक्ष में नहीं थीं। उनका कहना था कि वह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल नहीं रही थीं। उनके अनुसार, अध्यक्ष के निर्देश पर उन्होंने मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तैयार किया। इसके बाद तैयार रिजल्ट को JPSC के तीनों सदस्यों के पास स्क्रूटनी के लिए भेजे जाने की बात कही गई। दस्तावेजों के सत्यापन और सदस्यों से क्लीयरेंस मिलने के बाद फाइल सचिव को भेजी गई और अंत में अध्यक्ष की मंजूरी के बाद परिणाम प्रकाशित किया गया।

जांच के निष्कर्ष का इंतजार

श्वेता गुप्ता से पूछताछ में सामने आए कथित बयानों ने JPSC परीक्षा विवाद में आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूछताछ में दिए गए किसी भी बयान को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में CID की जांच जारी है और जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष, साक्ष्यों तथा आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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