भवन नियमीतीकरण पोर्टल में तकनीकी दिक्कत से आवेदक परेशान, फीस भुगतान विकल्प नहीं हुआ सक्रिय

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राज्य सरकार की भवन नियमीतीकरण योजना को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, लेकिन पोर्टल में आ रही तकनीकी समस्या के कारण आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने भवनों को नियमित कराने के लिए आवेदन तो जमा कर दिए हैं, लेकिन फीस जनरेट नहीं होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई है। इस स्थिति से भवन मालिकों और आर्किटेक्ट्स के बीच चिंता बढ़ गई है। कई आवेदकों को आशंका है कि तकनीकी खामी के कारण उनके आवेदन लंबित न रह जाएं।

आवेदन जमा हो रहे, लेकिन शुल्क भुगतान नहीं

जानकारी के अनुसार रांची समेत राज्य के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में आवेदन पोर्टल पर प्राप्त हुए हैं। आवेदन सफलतापूर्वक जमा हो रहे हैं, लेकिन शुल्क भुगतान का विकल्प अभी सक्रिय नहीं हुआ है। इसके कारण आवेदक अपनी फाइलों की अगली प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी लेने का प्रयास कर रहे हैं।

नक्शा स्वीकृति के बाद जमा होगी फीस

सरकार की ओर से जारी प्रावधानों के अनुसार भवन नियमीतीकरण के लिए आवासीय भवनों पर 10 हजार रुपये और व्यावसायिक भवनों पर 20 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह शुल्क आवेदन के तुरंत बाद नहीं, बल्कि भवन का नक्शा स्वीकृत होने के बाद जमा कराया जाएगा। नक्शा अनुमोदन के पश्चात आवेदक को भुगतान की अनुमति मिलेगी और शुल्क जमा होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

800 से अधिक आवेदन पहुंचे

सूत्रों के अनुसार रांची नगर निगम और रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (आरआरडीए)  में अब तक 800 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें अधिकांश मामलों की जांच और स्वीकृति प्रक्रिया जारी है। योजना के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए आने वाले दिनों में आवेदनों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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27 जून को समाप्त होगी आवेदन अवधि

राज्य सरकार ने अवैध भवनों के नियमीतीकरण के लिए 60 दिनों की विशेष समयसीमा निर्धारित की है। यह योजना 27 अप्रैल से लागू की गई थी और इसकी अंतिम तिथि 27 जून तय की गई है। अंतिम तारीख नजदीक आने के कारण विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और अधिक लोग आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के जल्द समाधान की मांग भी तेज हो गई है।

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