Samachar Post रिपोर्टर,जामताड़ा : देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। जसीडीह बाईपास नई रेल लाइन का निर्माण पूरा हो गया है और इसके परिचालन का रास्ता भी साफ हो गया है। पूर्वी परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) गुरु प्रकाश ने देवघर लिंक केबिन से कुमरबाद रोहिणी के बीच नवनिर्मित रेलखंड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद इस रेलखंड पर यात्री और मालगाड़ियों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटे की खंडीय गति से चलाने की अनुमति दे दी गई है।
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CRS ने ट्रैक और सुरक्षा व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण
CRS गुरु प्रकाश ने निरीक्षण के दौरान नई रेल लाइन, सिग्नलिंग, विद्युतीकरण, पुलों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। रेलखंड की परिचालन क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए मोटर ट्रॉली से भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान पूर्व रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) मनोज खान, आसनसोल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) संग्रह मौर्य समेत पूर्व रेलवे और आसनसोल मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
₹293.67 करोड़ की लागत से बनी 4.856 किमी रेल लाइन
देवघर लिंक केबिन के किमी 3.957 से कुमरबाद रोहिणी के किमी 8.813 तक इस नई बड़ी रेल लाइन का निर्माण किया गया है। इसकी कुल लंबाई 4.856 किलोमीटर है और परियोजना पर ₹293.67 करोड़ की लागत आई है। यह 1676 मिमी ब्रॉडगेज रेलखंड है और इसे 25 केवी एसी कर्षण प्रणाली से विद्युतीकृत किया गया है। यहां 60 किलोग्राम आर-260 लॉन्ग वेल्डेड रेल को पीएससी स्लीपरों पर बिछाया गया है।

12 पुल और 2 रोड ओवर ब्रिज बनाए गए
जसीडीह बाईपास रेल परियोजना के तहत कुल 12 पुलों का निर्माण किया गया है। इनमें 11 लघु आरसीसी बॉक्स पुल और 18.3 मीटर लंबा एक प्रमुख कंपोजिट गर्डर पुल शामिल है। इसके अलावा रेलखंड पर दो रोड ओवर ब्रिज (ROB) भी बनाए गए हैं। परियोजना के दौरान अधिकतम 21.44 मीटर ऊंचे तटबंध और 21.37 मीटर गहरी कटिंग जैसे चुनौतीपूर्ण सिविल कार्य भी किए गए। रेलखंड में सबसे तीक्ष्ण वक्र की त्रिज्या 375 मीटर और अधिकतम ढाल 1 in 180 रखी गई है। नई रेल लाइन को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) और मल्टीपल एस्पेक्ट कलर लाइट सिग्नलिंग सिस्टम से लैस किया गया है। रेलखंड में दो समपार फाटक भी हैं, जिन्हें 29/E/SPL और 28/T/SPL के रूप में चिह्नित किया गया है। आधुनिक सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों से रेल परिचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
जसीडीह जंक्शन पर घटेगा ट्रेनों का दबाव
जसीडीह बाईपास रेल लाइन शुरू होने के बाद देवघर और कुमरबाद रोहिणी के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा। देवघर जाने वाली ट्रेनों को जसीडीह जंक्शन में प्रवेश कर अनावश्यक रूप से इंजन की दिशा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय कम होगा। साथ ही ईंधन की खपत और अतिरिक्त क्रू की जरूरत भी घट सकती है। इससे जसीडीह जंक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और परिचालन का दबाव कम होगा।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगा फायदा
देवघर देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में बाईपास रेल लाइन के शुरू होने से देवघर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए रेल यात्रा अधिक सुविधाजनक और समय की बचत वाली हो सकती है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से देवघर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मालगाड़ियों के परिचालन को भी मिलेगी गति
जसीडीह बाईपास रेल लाइन का फायदा सिर्फ यात्री ट्रेनों को ही नहीं मिलेगा। मालगाड़ियों के लिए भी बेहतर और सुचारु रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे माल परिवहन की क्षमता बढ़ने और जसीडीह जंक्शन पर परिचालन को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है। रेल कनेक्टिविटी में सुधार से देवघर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

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