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करम पर्व पर जयराम महतो का संदेश, बोले- डॉक्टर-इंजीनियर बनें लेकिन भाषा, जमीन और संस्कृति न भूलें

Samachar Post रिपोर्टर, डुमरी : करम पर्व के अवसर पर डुमरी में आयोजित कार्यक्रम में जेएलकेएम प्रमुख और डुमरी विधायक जयराम महतो ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने करम पर्व की परंपराओं, जावा और ‘जावा की माई’ से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी से अपनी भाषा, संस्कृति, जमीन और पूर्वजों की परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की। जयराम महतो ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और रोजगार आज की जरूरत हैं। युवा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और शिक्षक बनें, लेकिन इसके साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को भी बनाए रखें। करम पर्व के दौरान उन्होंने ग्रामीण समाज में खेती और जमीन से जुड़े रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।

करम पर्व की परंपरा और जावा का किया जिक्र

जयराम महतो ने कहा कि अलग-अलग पर्व-त्योहारों के पीछे सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी होती हैं। इसी तरह करम पर्व भी झारखंड की संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लोगों से पर्व की परंपराओं और इससे जुड़े नियमों को समझने और आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने करम पर्व में जावा और ‘जावा की माई’ की परंपरा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस परंपरा से जुड़े खान-पान और अन्य नियमों का अपना सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है।

‘कुंवारी बहन को माई कहना सामान्य परंपरा नहीं’

अपने संबोधन में जयराम महतो ने ‘जावा की माई’ से जुड़ी परंपरा की व्याख्या करते हुए कहा कि सामान्य सामाजिक संबोधन में कुंवारी बहन को ‘माई’ कहना अलग संदर्भ रखता है, जबकि करम पर्व की परंपरा में ‘जावा की माई’ की विशेष भूमिका मानी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराओं के जरिए परिवार और समाज में बच्चों व बहनों के बीच सामाजिक संबंधों और जिम्मेदारियों की समझ विकसित होती है। उन्होंने लोगों से परंपराओं को केवल निभाने के बजाय उनके सामाजिक संदर्भ को समझने की बात कही।

युवाओं से भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की अपील

जयराम महतो ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से दूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिक शिक्षा हासिल करने के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी पहचान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके संबोधन में झारखंडी भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर विशेष जोर रहा। हालिया करम महोत्सवों में भी महतो ने झारखंडी संस्कृति और भाषा को आगे बढ़ाने की बात कही है।

खेती और जमीन से नाता बनाए रखने पर जोर

जयराम महतो ने लोगों से खेती और जमीन से अपना जुड़ाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने महाजन और कर्ज की व्यवस्था का जिक्र करते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता और खेती को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने पूर्वजों की सामाजिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंदों की मदद करना और घर आए व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटाना जैसी मान्यताएं ग्रामीण सामाजिक जीवन का हिस्सा रही हैं। उनके अनुसार, इन परंपराओं के पीछे समाज को एक-दूसरे से जोड़ने की भावना रही है।

सुआ और कौवा का उदाहरण देकर समझाया

जयराम महतो ने अपनी बात समझाने के लिए सुआ और कौवा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सुआ दूसरे की बोली की नकल करता है, जबकि कौवा अपनी आवाज में बोलता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने लोगों से अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखने से समाज अपनी पहचान को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचा सकता है।

करम पर्व की दी शुभकामनाएं

संबोधन के अंत में जयराम महतो ने लोगों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की प्रकृति, संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और सामुदायिक जीवन से जुड़ा पर्व है। उन्होंने लोगों से पर्व की परंपराओं को समझने, अपनी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की अपील की।

Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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